मथुरा पुलिस का बड़ा खुलासा: खुद पर फायरिंग कराने वाला ‘कथित पीड़ित’ ही निकला मास्टरमाइंड , साथी समेत गिरफ्तार

​सनसनी: दुश्मनों को फंसाने के लिए रची थी जानलेवा हमले की साजिश, पुलिस ने 48 घंटे में बेनकाब किया झूठ

​मथुरा । शहर की कोतवाली पुलिस ने एक ऐसे सनसनीखेज मामले का खुलासा किया है, जहाँ एक व्यक्ति ने अपने विरोधियों को जेल भिजवाने के लिए खुद पर ही फायरिंग की साजिश रच डाली। पुलिस ने ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत जांच करते हुए मुकदमा दर्ज कराने वाले वादी (पीड़ित) को ही उसके साथी के साथ गिरफ्तार कर लिया है। इनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त तमंचा और बिना नंबर की बाइक बरामद हुई है।

​बीते 23 फरवरी को रुकमणी विहार निवासी जगदीश पुत्र रामी ने कोतवाली में तहरीर दी थी कि संतोष गुप्ता और तीन अज्ञात बदमाशों ने उसके घर में घुसकर जान से मारने की नीयत से उस पर फायरिंग की है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल धारा 61(2)/109/333 BNS के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।

​प्रभारी निरीक्षक विनोद बाबू मिश्रा के नेतृत्व में जब पुलिस टीम ने साक्ष्यों की कड़ियाँ जोड़ीं, तो कहानी कुछ और ही निकली। सर्विलांस और मुखबिर की सूचना से पता चला कि वादी जगदीश ने खुद ही दुश्मनों को फंसाने के लिए मयंक उर्फ डम्फर के साथ मिलकर इस पूरी घटना की पटकथा लिखी थी। ​बुधवार को पुलिस ने सटीक सूचना पर रुकमणी विहार और पुरानी रेलवे लाइन के पास से दोनों अभियुक्तों को दबोच लिया। अभियुक्त मयंक के पास से .315 बोर का एक तमंचा, कारतूस और वारदात में इस्तेमाल बिना नंबर की प्लेटिना मोटरसाइकिल बरामद की गई है।​जगदीश (वादी): उम्र 35 वर्ष, निवासी रुकमणी विहार (साजिशकर्ता)। ​मयंक उर्फ डम्फर: उम्र 28 वर्ष, निवासी देवीपुरा, थाना हाईवे (सह-अभियुक्त)।

​इस खुलासे में कोतवाली प्रभारी विनोद बाबू मिश्रा, उपनिरीक्षक पवन कुमार और सनोज कुमार की अहम भूमिका रही। पुलिस का कहना है कि फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर कानून को गुमराह करने वालों के खिलाफ यह एक सख्त संदेश है। दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।