ब्रजधाम में उमड़ेगा आस्था का सैलाब; 27 फरवरी से शुरू होगा पंचदिवसीय रसीला उत्सव, चंद्रग्रहण के कारण 3 मार्च को बदलेगा दर्शन का समय
वृन्दावन। ब्रजधाम में रंगीली होली महोत्सव की तैयारियां अपने चरम पर पहुँच चुकी हैं। विश्वविख्यात श्रीबाँकेबिहारी मंदिर में इस बार व्यवस्थाएं सर्वाधिक जोरशोर से की जा रही हैं। पर्व पर जन-जन के आराध्य ठाकुर बाँकेबिहारी जी महाराज के होली खेलने हेतु देश के कोने-कोने से अति उत्तम और सुगंधित पदार्थ मँगवाए गए हैं।
सेवायत इतिहासकार आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी के अनुसार इस वर्ष ठाकुरजी विशेष रूप से कश्मीरी केसर, कन्नौजिया इत्र, कर्नाटकी चंदन और हाथरस के प्राकृतिक अबीर-गुलाल से भक्तों के साथ होली खेलेंगे। महोत्सव के लिए विशेष रूप से काबुली मेवा भी मँगाई गई है जिसका ठाकुरजी को भोग अर्पित किया जाएगा।
मंदिर में रंगोत्सव का आगाज 27 फरवरी (रंगभरी एकादशी) से होगा जो 2 मार्च (चतुर्दशी) की रात्रि तक अनवरत चलेगा। इस दौरान ठाकुरजी जगमोहन में भव्य सिंहासन पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। श्रद्धालुओं पर बरसाने के लिए मंदिर के प्राचीन ‘होली कक्ष’ में लोहे की बड़ी-बड़ी कढ़ाइयों में टेसू के फूलों को उबालकर करीब 25 हजार लीटर प्राकृतिक रंग तैयार किया जा रहा है। यह रंग न केवल दिव्य है बल्कि त्वचा संबंधी रोगों के लिए भी लाभकारी माना जाता है। इस महोत्सव के दौरान मंदिर में एक किलो से अधिक केसर और लगभग तीन हजार किलो गुलाल का उपयोग होने का अनुमान है।
होली के इन दिनों में ठाकुरजी के खान-पान का भी विशेष ध्यान रखा गया है।
सेवायत के मुताबिक प्रभु को दहीबड़ा, दहीपकौड़ी, सोंठबड़ा, सोंठपकौड़ी, आटे-सूजी की टिकिया, पानी पूरी, समोसा, गुझिया, पापड़ी, खाजा और ठोर जैसे व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा। इसके साथ ही काजू, बादाम, पिस्ता और गुलकंद युक्त विशेष ठंडाई एवं आलू-मैदा की स्वादिष्ट जलेबियां भी अर्पित की जाएंगी।
चंद्रग्रहण का प्रभाव और समय परिवर्तन:
आगामी 3 मार्च को डोलोत्सव (धुलैडी) के अवसर पर चंद्रग्रहण होने के कारण मंदिर की समय सारिणी में बड़ा बदलाव किया गया है। उस दिन मंदिर के पट प्रातः 6:15 बजे ही खुल जाएंगे। सेवायत प्रातः 5:15 बजे मंदिर में प्रवेश करेंगे और श्रृंगार आरती 6:25 बजे होगी। राजभोग सेवा 6:30 बजे शुरू होकर 8:30 बजे राजभोग आरती के साथ संपन्न होगी। सुबह 9 बजे मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद शाम को मंदिर पुनः 7 बजे खुलेगा और रात 10 बजे तक दर्शन हो सकेंगे। मंदिर प्रबंधन ने सूचना बोर्ड के माध्यम से अपील की है कि जिन भक्तों को रंग-गुलाल से आपत्ति हो वे उत्सव के दौरान मंदिर में प्रवेश न करें।