सात समंदर पार से आए परिंदों ने मोहा विदेशी सैलानियों का मन, मथुरा का ‘जोधपुर झाल’ बना अंतरराष्ट्रीय टूरिस्ट हब

​मथुरा। ब्रज की पावन रज अब न केवल आध्यात्मिक शांति, बल्कि ईको-टूरिज्म के वैश्विक केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना रही है। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और वन विभाग के साझा प्रयासों से विकसित जोधपुर झाल वेटलैंड इन दिनों देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। दूर देशों से आए रंग-बिरंगे प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट ने यहाँ के वातावरण को किसी स्वप्नलोक जैसा बना दिया है।

​इंग्लैंड के वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर भी हुए कायल
​जोधपुर झाल की ख्याति अब सरहदों के पार पहुँच चुकी है। दिल्ली में इस वेटलैंड की चर्चा सुनकर इंग्लैंड के प्रसिद्ध वन्यजीव फोटोग्राफर ऐश्ले बून खुद को यहाँ आने से रोक नहीं पाए। नेचर गाइड गजेंद्र सिंह और टूर ऑपरेटर वी. गोस्वामी के साथ जोधपुर झाल पहुँचे ऐश्ले ने घंटों पक्षियों की अठखेलियों को अपने कैमरे में कैद किया।
ऐश्ले बून के शब्द: “मैंने इस वेटलैंड के बारे में जितना सुना था, यह उससे कहीं अधिक सुंदर और समृद्ध है। मात्र दो घंटे के भ्रमण में मैंने पक्षियों की इतनी प्रजातियां देखीं जो वाकई विस्मित करने वाली हैं। यह मेरी भारत यात्रा का सबसे सुखद अनुभव है।

​बीआरडीएस संस्था के ईकोलॉजिस्ट डॉ. के.पी. सिंह ने बताया कि जोधपुर झाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रवासी पक्षियों के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल आवास के रूप में उभर रहा है। वर्तमान में यहाँ मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रजातियां दिखाई दे रही हैं:
​हंस व बत्तख प्रजाति: बार-हेडेड गूज, ग्रे-लैग गूज, नॉर्दर्न पिनटेल, नॉर्दर्न शोवलर, गेडवाल, कॉमन टील और टफ्टिड डक।
​शिकारी पक्षी: ग्रेटर स्पॉटेड ईगल और मार्श हैरियर।
​अन्य रंगीन पक्षी: सिट्रिन वैगटेल, ब्लूथ्रोट, साइबेरियन स्टोनचैट और कॉमन कूट।
उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के पर्यावरण सलाहकार मुकेश शर्मा के अनुसार, मथुरा-आगरा सीमा पर फरह के निकट स्थित यह वेटलैंड जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। परिषद और वन विभाग के समन्वय से यहाँ सतत विकास कार्य किए जा रहे हैं, जिससे न केवल प्रकृति का संरक्षण हो रहा है, बल्कि स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिल रही है।