लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। समाजवादी पार्टी ने किसानों के मुद्दे पर विधान परिषद से बहिर्गमन कर सरकार पर किसान विरोधी नीतियों का आरोप लगाया जबकि सरकार ने बिजली आपूर्ति और कल्याणकारी योजनाओं को अपनी बड़ी उपलब्धि बताया।
सदन में ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा ने कहा कि प्रदेश में प्रति व्यक्ति बिजली खपत 724 यूनिट तक पहुंचना ऐतिहासिक उपलब्धि है। गरीब उपभोक्ताओं को बिल जमा करने पर 25 प्रतिशत छूट दी गई है और किसानों के बिजली बिल माफ किए गए हैं। उन्होंने निजीकरण की चर्चाओं पर कहा कि सरकार जो भी निर्णय करेगी वह जनता और पिछड़े क्षेत्रों के हित में होगा। मंत्री ने यह भी दावा किया कि छह वर्षों में बिजली दरों में वृद्धि नहीं की गई और अब प्रदेश के हर नागरिक तक निर्बाध बिजली पहुंच रही है।
विपक्ष ने सरकार के दावों पर सवाल उठाए। सपा विधायक संग्राम सिंह यादव ने कहा कि सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है और लोक सेवा आयोग तथा सेवा चयन आयोग की भर्तियों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने युवाओं और किसानों के साथ धोखा करने का आरोप लगाया।
आराधना मिश्रा मोना ने आईटीआई संस्थानों को पीपीपी मॉडल पर चलाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे गरीब विद्यार्थियों पर महंगी फीस का बोझ पड़ रहा है। उन्होंने कई भवन तैयार होने के बावजूद संस्थान संचालित न होने की समस्या उठाई जिस पर सरकार ने रिक्त पदों पर भर्ती कर जल्द संचालन शुरू कराने का आश्वासन दिया।
निवेश के मुद्दे पर औद्योगिक मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने कहा कि राज्य को निवेशकों का पसंदीदा गंतव्य बनाने के लिए 32 से अधिक नीतियां लागू की गई हैं और पूर्वांचल व बुंदेलखंड सहित पिछड़े जिलों को प्राथमिकता दी जा रही है।
बुधवार को बिजली व्यवस्था को लेकर मंत्री और विपक्षी सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। शिक्षामित्रों के मानदेय और ग्रामीण तैनाती जैसे मुद्दों पर भी सरकार से जवाब मांगा गया। सदन में जारी हंगामे के बीच आज भी तीखी बहस और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी रहने के आसार हैं।