सोशल मीडिया: संवाद का सशक्त माध्यम या निजता पर मंडराता खतरा

आज का युग संचार क्रांति का युग है। तकनीक ने मानव जीवन को तेज सरल और व्यापक बनाया है। सोशल मीडिया और एआई के माध्यम से संवाद अब सीमाओं से परे पहुंच चुका है। विचारों का आदान प्रदान कुछ ही क्षणों में विश्व स्तर पर संभव हो गया है। लेकिन इसी तेज रफ्तार डिजिटल विकास के साथ एक गंभीर संकट भी जुड़ गया है और वह है निजता का संकट। सोशल मीडिया ने जहां आत्म अभिव्यक्ति को नया मंच दिया है वहीं इसने व्यक्तिगत जीवन को सार्वजनिक प्रदर्शन में बदल दिया है। लोग अपने निजी क्षण तस्वीरें वीडियो स्थान और दिनचर्या बिना सोचे समझे साझा कर रहे हैं। लाइक और व्यू की होड़ में निजी सीमाएं धुंधली होती जा रही हैं। यह प्रवृत्ति धीरे धीरे व्यक्ति की सुरक्षा और मानसिक शांति के लिए खतरा बनती जा रही है। आज दुनिया की अधिकांश आबादी स्मार्टफोन और इंटरनेट से जुड़ी हुई है। भारत भी इस डिजिटल विस्तार में तेजी से आगे बढ़ रहा है। बड़ी संख्या में लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं लेकिन बहुत कम लोग यह समझते हैं कि साइन अप करते समय दी गई व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग भी हो सकता है। कई बार यह डेटा बिना अनुमति तीसरे पक्ष तक पहुंच जाता है जिससे वित्तीय सामाजिक और मानसिक नुकसान की आशंका बढ़ जाती है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी कंपनी को नागरिकों की निजी जानकारी के साथ मनमानी करने का अधिकार नहीं है। निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है और इसका उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट की यह टिप्पणी डिजिटल युग में व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए एक मजबूत संदेश है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं की हर गतिविधि पर नजर रखते हैं। उनकी पसंद नापसंद रुचि स्थान और व्यवहार का विश्लेषण कर डेटा एकत्र किया जाता है। इस डेटा का उपयोग विज्ञापन व्यावसायिक लाभ और कभी कभी राजनीतिक हितों के लिए भी किया जाता है। डेटा लीक फेक प्रोफाइल साइबर स्टॉकिंग और ट्रोलिंग जैसी समस्याएं निजता के हनन को और गंभीर बनाती हैं। इसका सबसे अधिक प्रभाव बच्चों और किशोरों पर पड़ता है जो जोखिम को समझे बिना ऑनलाइन दुनिया में सक्रिय रहते हैं।

निजता की रक्षा के लिए केवल कानून ही पर्याप्त नहीं है बल्कि समाज और व्यक्ति दोनों की सजगता आवश्यक है। मजबूत डेटा संरक्षण कानून पारदर्शी नीतियां और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही जरूरी है। साथ ही उपयोगकर्ताओं को भी डिजिटल साक्षरता अपनानी होगी। मजबूत पासवर्ड सीमित जानकारी साझा करना गोपनीयता सेटिंग्स का सही उपयोग और सतर्क व्यवहार समय की मांग है। सोशल मीडिया का उद्देश्य संवाद और जुड़ाव को बढ़ाना है न कि व्यक्ति की निजता को खतरे में डालना। विवेकपूर्ण उपयोग से ही अभिव्यक्ति और निजता के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है। यही संतुलन डिजिटल युग की सबसे बड़ी आवश्यकता है।