बांके बिहारी मंदिर में रेलिंग पर राजनीति! डीएम ने अफवाहबाजों को दी चेतावनी ‘झूठ फैलाया तो होगी कड़ी कार्रवाई’

ठेकेदार के नाम पर फैलाया जा रहा झूठ

वृंदावन। श्री बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम दर्शन व्यवस्था को लेकर लगाए जा रहे स्टेनलेस स्टील रेलिंग के मुद्दे पर फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाओं पर जिलाधिकारी सीपी सिंह ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि सोशल मीडिया पर जानबूझकर झूठ फैलाने और मंदिर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
डीएम सीपी सिंह ने बताया कि मंदिर में श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती भीड़ को देखते हुए यह निर्णय माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित उच्चाधिकार समिति (न्यायमूर्ति अशोक कुमार की अध्यक्षता) के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। इसका उद्देश्य केवल और केवल श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्थित दर्शन सुनिश्चित करना है।
डीएम ने बताया कि मंदिर परिसर में लगाई जा रही रेलिंग सामान्य नहीं बल्कि उच्च गुणवत्ता की स्टेनलेस स्टील रेलिंग है, जिसकी तकनीकी जांच और सुरक्षा परीक्षण IIT रुड़की के विशेषज्ञों द्वारा किया गया है। ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना की संभावना न रहे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरी व्यवस्था पर होने वाला खर्च मंदिर के कोष से नहीं किया जा रहा है। यह राशि राष्ट्रीयकृत बैंकों की CSR (कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) निधि से प्राप्त की गई है। बावजूद इसके कुछ तत्व यह प्रचार कर रहे हैं कि मंदिर के धन का दुरुपयोग हो रहा है जो पूरी तरह भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण है।

सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैलाई जा रही है कि रेलिंग लगाने वाला ठेकेदार किसी समुदाय विशेष से जुड़ा है। इस पर डीएम ने सख्ती से कहा कि कार्य रूपेश शर्मा ठेकेदार द्वारा कराया जा रहा है। ठेकेदार के नाम और धर्म को लेकर फैलाया जा रहा भ्रम समाज को बांटने की साजिश है।
रेलिंग को लेकर यह भी भ्रम फैलाया जा रहा है कि मंदिर का स्वरूप बदला जा रहा है। डीएम ने बताया कि यह रेलिंग डिटैचेबल (निकालने योग्य) हैं। जरूरत पड़ने पर इन्हें हटाया भी जा सकता है। मंदिर की परंपरा, स्वरूप और गरिमा से कोई छेड़छाड़ नहीं की जा रही।
जिलाधिकारी सीपी सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा —
“जो लोग सोशल मीडिया के माध्यम से मंदिर के नाम पर माहौल बिगाड़ने, भ्रम फैलाने या धार्मिक भावनाएं भड़काने का प्रयास कर रहे हैं, उनके विरुद्ध आईटी एक्ट व अन्य विधिक प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।”
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि किसी भी अपुष्ट पोस्ट, वीडियो या संदेश पर विश्वास न करें और प्रशासन का सहयोग करें।

बांके बिहारी मंदिर में रेलिंग लगाने का निर्णय न तो मनमाना है, न ही किसी एजेंडे के तहत। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की समिति के निर्देशों, IIT रुड़की की तकनीकी जांच और CSR फंडिंग के माध्यम से श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। इसके बावजूद कुछ लोग जानबूझकर भ्रम फैलाकर व्यवस्था को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, जिस पर प्रशासन ने अब सख्त रुख अपना लिया है।