मथुरा। विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर अन्तर्राष्ट्रीय साहित्य कला व संस्कृति केन्द्र, भारत (रजि.) द्वारा एक भव्य वैश्विक ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में देश-विदेश के साहित्यकारों, शिक्षाविदों और हिन्दी सेवी विद्वानों ने एकजुट होकर हिन्दी को वैश्विक भाषा के रूप में स्थापित करने को लेकर गहन विचार-मंथन किया।
संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोकनाट्यविद एवं वैश्विक हिन्दी सेवी डॉ. खेमचन्द यदुवंशी शास्त्री ने कहा कि हिन्दी आज विश्व के 153 देशों में बोली जाने वाली विश्व की तीसरी सबसे बड़ी भाषा बन चुकी है। हमारा लक्ष्य इसे विश्व की सर्वाधिक लोकप्रिय भाषा बनाना है लेकिन इसके लिए नई पीढ़ी को हिन्दी के महत्व और उपयोगिता से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता साझा संसार फाउंडेशन, नीदरलैंड्स के अध्यक्ष डॉ. रामा तक्षक ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. हाइन्स वर्नर वेसलर (चांसलर, उपसाला विश्वविद्यालय, स्वीडन) ऑनलाइन जुड़े।
प्रो. हाइन्स वर्नर वेसलर ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा हिन्दी की शोभायात्रा विदेशी भूमि पर बड़े सम्मान के साथ आगे बढ़ रही है। आज हिन्दी विश्व के अनेक देशों में लगभग साढ़े तीन सौ करोड़ लोगों की भाषा बन चुकी है। यह प्रवासी भारतीयों के लिए गर्व का विषय है।
संगोष्ठी में डॉ. हरिसिंह पाल (दिल्ली), डॉ. यूरी बोत्विंकिन (यूक्रेन), डॉ. मौना कौशिक (बल्गारिया), डॉ. अर्चना पैन्यूली (डेनमार्क), डॉ. इन्दु बारौठ (अमेरिका), डॉ. दीपा दिनेशनील (जर्मनी), डॉ. अभिषेक त्रिपाठी (आयरलैंड), प्रो. डॉ. मंजू यादव (स्पेन), डॉ. निधि मिश्र (इटली), डॉ. कपिल कुमार (बेल्जियम) सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय विद्वानों ने हिन्दी की वैश्विक स्वीकार्यता पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का शुभारंभ रंग आचार्य डॉ. मुकेश पण्डित द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद “विश्व क्षितिज पर हिन्दी के बढ़ते कदम” विषय पर हुई संगोष्ठी में नेपाल, जापान, इंग्लैंड, अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब सहित कई देशों से जुड़े वक्ताओं ने हिन्दी की बढ़ती लोकप्रियता को विभिन्न दृष्टिकोणों से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन भूटानी पोएट्री क्लब की संस्थापिका डॉ. सीता माया रानी चुग (भूटान) ने किया जबकि आचार्य डॉ. के. सी. शास्त्री ने सभी अतिथियों एवं सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।