मथुरा। कान्हा की नगरी मथुरा का जिला अस्पताल इन दिनों मरीजों के इलाज के लिए कम और ‘फर्जी मेडिकल रिपोर्ट’ तैयार करने के काले कारोबार के लिए ज्यादा चर्चाओं में है। अस्पताल के गलियारों में संगीन धाराएं लगवाने और हटवाने का खेल खुलेआम चल रहा है, जिससे न्याय प्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक मारपीट और झगड़े के मामलों में विपक्षी पार्टी को जेल भेजने या उन पर संगीन धाराएं (जैसे धारा 307 व अन्य) बढ़वाने के लिए जिला अस्पताल में सक्रिय सिंडिकेट मोटी रकम वसूल रहा है। इस खेल में घायलों की चोटों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है ताकि पुलिस केस को और अधिक गंभीर बनाया जा सके।
अस्पताल के अंदरूनी सूत्रों और पीड़ितों की मानें तो इस पूरे ‘खेल’ का मास्टरमाइंड जिला अस्पताल में तैनात सर्जन डॉ. विकास कुमार को बताया जा रहा है। आरोप है कि डॉ. विकास कुमार के संरक्षण में दलालों का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। जो लोग पैसा देने में सक्षम हैं, उनकी साधारण चोट को भी गंभीर (Grievous injury) घोषित कर दिया जाता है, जबकि असली पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटकते रहते हैं।
हैरानी की बात यह है कि अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे यह फर्जीवाड़ा लंबे समय से जारी है। जिला अस्पताल में आने वाले घायलों के मेडिकल परीक्षण में पारदर्शिता की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि डॉ. विकास कुमार के कार्यकाल में जारी किए गए पिछले कुछ महीनों के मेडिकल रिपोर्ट की उच्च स्तरीय जांच हो, तो एक बहुत बड़े घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है।
इस भ्रष्टाचार के कारण आम जनता का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और निष्पक्ष जांच से भरोसा उठता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी और जिला प्रशासन इस ‘मास्टरमाइंड’ और उसके नेटवर्क पर क्या कार्रवाई करते हैं।
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