वायु प्रदूषण फेफड़ों और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए घातक : डॉ. प्रमोज जिंदल

नई दिल्ली। वायु प्रदूषण आज देश की सबसे गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हो चुका है। तेज़ी से बढ़ता शहरीकरण, औद्योगिक गतिविधियां, वाहनों से निकलता धुआं और त्योहारों के दौरान पटाखों का अत्यधिक प्रयोग हवा को लगातार ज़हरीला बना रहा है। इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर पड़ रहा है।

बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नई दिल्ली के थोरैसिक ऑन्कोलॉजी एवं लंग ट्रांसप्लांटेशन विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. प्रमोज जिंदल का कहना है “हम रोज़ जिस हवा में सांस लेते हैं वही हमारी सेहत की दिशा तय करती है। प्रदूषित हवा केवल खांसी या सांस फूलने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह फेफड़ों को अंदर से धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती है। हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण इतने बारीक होते हैं कि वे सांस के साथ सीधे फेफड़ों की गहराई तक पहुंच जाते हैं और कई बार रक्त प्रवाह में भी शामिल हो जाते हैं। इसके कारण गले में जलन, लगातार खांसी, सीने में जकड़न और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने से अस्थमा, फेफड़ों में संक्रमण, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस और यहां तक कि फेफड़ों के कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है। बच्चों में यह फेफड़ों के विकास को प्रभावित कर सकता है, जिससे भविष्य में सांस संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

डॉ. जिंदल के अनुसार, वायु प्रदूषण का सबसे गंभीर असर COPD (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) से पीड़ित मरीजों पर पड़ता है। COPD मरीजों के फेफड़े पहले से ही कमजोर होते हैं। ऐसे में प्रदूषण का थोड़ा-सा बढ़ना भी उनकी स्थिति को गंभीर बना सकता है और अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ सकती है।
गर्भवती महिलाओं के लिए भी प्रदूषित हवा अत्यंत खतरनाक सिद्ध हो सकती है। गर्भावस्था के दौरान मां द्वारा सांस के माध्यम से लिए गए हानिकारक तत्व गर्भस्थ शिशु तक पहुंच सकते हैं, जिससे समय से पहले प्रसव, कम वजन के बच्चे और भविष्य में बच्चों में अस्थमा या अन्य श्वसन रोगों का खतरा बढ़ जाता है। त्योहारों के दौरान पटाखों से होने वाला प्रदूषण इस जोखिम को और अधिक बढ़ा देता है।
“वायु प्रदूषण से बचाव केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। आम नागरिकों को भी जागरूक होना होगा। पटाखों से दूरी बनाना, अनावश्यक वाहन उपयोग से बचना और स्वच्छ हवा को प्राथमिकता देना आज की आवश्यकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि स्वच्छ हवा कोई विलासिता नहीं बल्कि स्वस्थ जीवन की बुनियाद है। यदि समय रहते वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को इसका खामियाजा गंभीर बीमारियों के रूप में भुगतना पड़ेगा।