विज्ञापन जारी करने में उच्चतम न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर रहा है सूचना निदेशालय

लखनऊ । उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय द्वारा अधिकतर विज्ञापन एवं अखबारों में छपे हुए समाचारों अथवा लेख के एडवरटोरियल कुछ चुनिंदा बड़े अखबारों को ही जारी कर उनको अनुचित रूप से वित्त पोषित किया जा रहा हैं। उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुसार सभी समाचार पत्रों को समानता के आधार पर समान रूप से विज्ञापन दिए जाने चाहिए।

आल इंडिया स्माॅल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव अशोक नवरत्न ने एक पत्र के माध्यम से मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन को अवगत कराया है कि माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद में योजित याचिका संख्या सी-7876/2025 की प्रति आपके कार्यालय को काफी समय पूर्व प्राप्त कराई जा चुकी है। भारतीय प्रेस परिषद की विज्ञापन उप समिति की संस्तुतियां पीसीआई के सचिव द्वारा भेजी गई थी। जिसकी एक प्रति आपके निजी सचिव भवानी सिंह को 23.10.2024 को प्राप्त कराई गई थी। इसकी एक प्रति प्रमुख सचिव सूचना के कार्यालय तथा सूचना निदेशालय को भी प्राप्त करायी गई थी। मुख्यमंत्री को सम्बोधित पत्र पर भी कोई भी सार्थक कार्यवाही अभी तक नहीं हुई है। कामन काज बनाम यूनियन आफ इंडिया रिट पिटीशन (सिविल)13 व आफ 2003 में 13 मई 2015 को माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा 13 मई 2015 को दिए गये निर्णय/निर्देशों का अनुपालन नहीं हो रहा है।

आल इंडिया स्माॅल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष शोएब अहमद ने कहा है कि माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णय 13 मई 2015 तथा भारतीय प्रेस परिषद की संस्तुतियों पर अविलम्ब ही कार्यवाही सुनिश्चित होनी चाहिए। माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों को नहीं मानना न्यायिक अवमानना की श्रेणी में आता हैं। फेडरेशन के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश गोयल ने बताया कि उक्त कार्यवाही की जानकारी पत्र के माध्यम से मुख्य न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली, मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय, प्रयागराज, चेयर पर्सन भारतीय प्रेस परिषद, नई दिल्ली, प्रमुख सचिव सूचना, उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ एवं निदेशक, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ को दे दी गयी है।