नई दिल्ली । अब मरीजों को यह जानने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा कि कौन सी एंटीबायोटिक दवा उनके लिए सही है। आईआईटी मद्रास के वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है, जो केवल तीन घंटे में सही एंटीबायोटिक चुनने में मदद करेगी। आमतौर पर डॉक्टरों को संक्रमण वाले मरीजों पर दवा असरदार है या नहीं, यह पता करने में दो से तीन दिन लगते हैं। मरीजों को अनुमान से दवा दे दी जाती है, जो कई बार असरदार नहीं होती। इससे इलाज देर से शुरू होता है और बैक्टीरिया पर दवाओं का असर नहीं होता। इससे संक्रमण बढ़ने का खतरा बना रहता है। इस तरह काम करता है डिवाइस यह डिवाइस एक छोटी माइक्रोफ्लूडिक चिप पर काम करता है, जिसमें खास तरह के कार्बन इलेक्ट्रोड लगे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि डिवाइस बैक्टीरिया की हलचल को बहुत बारीकी से समझ लेता है। अगर दवा असर करती है तो बैक्टीरिया तुरंत प्रतिक्रिया दिखाते हैं और मशीन तीन घंटे में परिणाम बता देती है। इसके लिए मरीज को दवा की कम खुराक दी जाती है और डिवाइस के जरिये खून के नमूनों से जांच संभव हो जाती है। सटीक और आसान तकनीक इस शोध टीम का नेतृत्व आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर एस पुष्पवनम कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह तकनीक तेज, सटीक और आसान है। उन्होंने कहा, अक्सर जब जांच में देर होती है, तो डॉक्टर ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक दे देते हैं, जो कई तरह के बैक्टीरिया पर असर करती है। लेकिन इसके ज्यादा इस्तेमाल से बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं। यही समस्या एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस कहलाती है, जिसे दुनिया की बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में गिना जाता है।