मथुरा रिफाइनरी में शटडाउन के दौरान भीषण हादसा , खौलता तेल गिरने से मजदूर गंभीर रूप से झुलसे

सुरक्षा मानकों को ताक पर रख कराया जा रहा था काम; पीपीई किट को लेकर मजदूरों में भारी आक्रोश, दिल्ली अपोलो रेफर, ​रिफाइनरी प्रमुख मुकुल अग्रवाल ने साधी चुप्पी

​मथुरा । मथुरा रिफाइनरी से एक बेहद परेशान करने वाली और प्रबंधन की बड़ी लापरवाही की खबर सामने आई है। रिफाइनरी में चल रहे शटडाउन कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण एक भीषण हादसा हो गया। ओएफसी (OFC) यूनिट में वॉल्व खोलते समय अचानक अत्यधिक गर्म (खौलता हुआ) ऑयल गिरने से दो मजदूर बुरी तरह झुलस गए। हादसे के बाद रिफाइनरी परिसर में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में गंभीर रूप से घायल एक मजदूर को दिल्ली के अपोलो अस्पताल रेफर किया गया है, जहां उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।

मिली जानकारी के अनुसार रिफाइनरी क्षेत्र के पीलुआ गांव निवासी कांट्रैक्टर वर्कर दीनदयाल उर्फ दीना और एक अन्य मजदूर रफीक ओएफसी यूनिट में काम कर रहे थे। यह दोनों मजदूर ‘अमर इंजीनियरिंग वर्क्स’ द्वारा पेटी (सब-कॉन्टैक्ट) पर दिए गए ठेके के अंतर्गत ‘गोगीवालों’ के यहां कार्यरत थे। शटडाउन प्रक्रिया के दौरान जैसे ही मजदूर ने वॉल्व खोला अचानक उस पर अत्यधिक गर्म तेल गिर गया। गर्म तेल की चपेट में आने से दोनों मजदूर चीखने लगे। मौके पर मौजूद अन्य कर्मियों ने आनन-फानन में उन्हें स्थानीय स्तर पर प्राथमिक उपचार दिलाया लेकिन दीनदयाल की नाजुक हालत को देखते हुए उसे तुरंत दिल्ली के अपोलो अस्पताल के लिए रवाना किया गया।

इस हादसे के बाद रिफाइनरी के अन्य मजदूरों में प्रबंधन के खिलाफ भारी रोष व्याप्त है। मजदूरों का सीधा आरोप है कि बेहद संवेदनशील और हीटिंग वाले इस कार्य के दौरान सुरक्षा उपकरणों और नियमों की घोर अनदेखी की गई। मजदूरों के अनुसार, ओएफसी यूनिट में काम करते समय ‘हीटिंग सूट’ पहनना अनिवार्य होता है, जो अत्यधिक गर्म तरल पदार्थों से सुरक्षा देता है लेकिन ठेकेदार और प्रबंधन द्वारा मजदूर को सिर्फ ‘आईएफआर (IFR) सूट’ पहनाकर काम पर लगा दिया गया, जो खौलते तेल को झेलने में सक्षम नहीं था। मजदूरों का कहना है कि चंद पैसों की बचत और लापरवाही के कारण मजदूरों की जान दांव पर लगा दी गई।

शटडाउन जैसे बेहद संवेदनशील और जोखिम भरे काम के दौरान सुरक्षा इंतजामों में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई, इसे लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस पूरे हादसे और सुरक्षा मानकों में हुई लापरवाही को लेकर जब रिफाइनरी प्रमुख मुकुल अग्रवाल से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने पूरे मामले पर मौन धारण कर लिया है। अधिकारियों की इस चुप्पी से मजदूरों और स्थानीय लोगों में आक्रोश और बढ़ गया है। फिलहाल, दोनों घायल मजदूरों के परिजन और साथी उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं वहीं रिफाइनरी के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तनाव का माहौल है।

रिफाइनरी प्रबंधन के अनुसार मथुरा रिफाइनरी के फ्लूइड कैटेलिटिक क्रैकिंग (FCC) यूनिट में बुधवार सुबह करीब 10 बजे मेंटेनेंस कार्य के दौरान एक हादसा हो गया। इस दौरान गर्म तेल के छींटे पड़ने से आसपास कार्य कर रहे दो संविदा श्रमिक उसकी चपेट में आ गए और घायल हो गए। घटना के तुरंत बाद दोनों घायलों को मथुरा रिफाइनरी अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें दिल्ली के अपोलो अस्पताल रेफर कर दिया गया है। रिफाइनरी प्रबंधन द्वारा घायलों को हर संभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। रिफाइनरी प्रशासन के अनुसार, इस घटना के बावजूद रिफाइनरी का संचालन सामान्य रूप से जारी है।