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धर्म

प्राण और शरीर का योग जीवन है

प्रकृति आनंद से भरीपूरी है लेकिन मनीषियों ने संसार को दुखमय बताया है। दुख और आनंद साथ-साथ नहीं रह सकते। संसार वस्तुतः हमारे मन का सृजन है। प्रकृति सदा से है। आनंद से भरी पूरी होने के कारण ही वह सतत् सृजनरत है। संसार इसी का भाग है। तो…
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गुरु ही संस्कार को परिष्कृत करता है

गुरु तत्व प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में कहीं न कहीं, किसी न किसी रूप में व्याप्त होता है। लौकिक ज्ञान से लेकर ब्रहमज्ञान तक, जन्म से लेकर मृत्यु तक गुरु तत्व की उपस्थिति बनी रहती है। कोई शिक्षा गुरु होता है, तो कोई कुल गुरु। वस्तुतः गुरु…
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धन की कमी है तो श्रावण माह में जरूर करें इस रुद्राक्ष को धारण

सनातन धर्म में रुद्राक्ष का बड़ा ही विशेष महत्व हैं। स्वयं भगवान भोलेनाथ का स्वरूप कहे जाने वाला रुद्राक्ष दैवीय गुणों से भरपूर होकर अत्यंत लाभदायक होता हैं। पृथ्वी पर अनेक रुद्राक्ष पाये जाते हैं जिनका अपना अलग-अलग महत्व होता हैं। इन्ही…
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कलाशांति ज्योतिष साप्ताहिक राशिफल (25 से 31 जुलाई)

आपकी लग्नराशि पर आधारित कलाशांति ज्योतिष साप्ताहिक राशिफल में जानिए, आपका पारिवारिक जीवन, आर्थिक दशा, स्वास्थ्य व कार्यक्षेत्र में आपकी स्थिति इस सप्ताह कैसी रहेगी और यह भी जानिए कि इस सप्ताह आपको क्या-कुछ मिलने वाला है, आपके लिए…
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गायत्री मंत्र व उसका प्रामाणिक ऋषिकृत अर्थ

गायत्री मंत्र आध्यात्मिक एवं सामाजिक जीवन में एक श्रेष्ठ वेदमन्त्र के रूप में विश्व में जाना जाता है। इसमें दी गई शिक्षा के मनुष्यमात्र के लिए कल्याणकारी होने के प्रति कोई भी मतावलम्बी अपने आप को पृथक नहीं कर सकता जैसा कि अनेक मामलों में…
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ईश्वर के साक्षात्कार रूप के दर्शन से मन में व्याप्त कुरीतिया हो सकती है समाप्त: साध्वी देवी निधि

मथुरा। आध्यात्मिक भक्ति ज्ञान केंद्र के सानिध्य में नारायनेश्वर महादेव मंदिर नगला नारायण सिंह कोसी खुर्द मथुरा में व्यास देवी चरण शास्त्री की शिष्या देवी निधि शास्त्री ने श्रीमद् भागवत कथा के दौरान अपने प्रवचनों की ऐसी अमृत बरसा की कथा में…
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चालबाजियों में नहीं है जीवन का सुख

अगर हम खुद को श्रेष्ठ और बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं तो हमारे दिमाग में कई तरह की चालबाजियां आने पर भी हम उनमें भाग नहीं लेते। हम ईमानदारी से जीवन जीते हैं। चालाकियों के साथ हम दूसरों को प्रभावित तो कर सकते हैं लेकिन ये हमें सुकून…
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करिए हनुमानजी के इन 5 स्वरूपों की पूजा, होगी हर मनोकामना पूरी

कहते हैं कलियुग में समस्त दुखों का नाश महज हनुमानजी की आराधना से हो जाता है। बैकुंठ जाते वक्त मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने अपने परम भक्त हनुमान को इसी उद्देश्य से धरती पर रहने का आदेश दिया था। ऐसी मान्यता है कि कलियुग में हनुमानजी की…
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सूर्य को जल चढ़ाने के लाभ

सूर्य को जल चढ़ाने के अनेकों लाभ ज्योतिष शास्त्र में बताए गए हैं। ज्योतिष में सूर्य को ग्रहों का राजा माना गया है। सूर्य की कृपा के बिना व्यक्ति को समाज में उचित मान-सम्मान प्राप्त हो ही नहीं सकता। सूर्य उदय के समय सूर्य को अर्घ्य देना…
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धर्म-कर्म हम जो देते हैं वही हमारा गुण बन जाता है

पानी, हवा, अंतरिक्ष और पूरा जगत ही रंगहीन है। यहां तक कि जिन चीजों को आप देखते हैं, वे भी रंगहीन हैं। रंग केवल प्रकाश में होता है। आप जो भी रंग चाहते हैं, वे सभी सिर्फ प्रकाश में है। अगर प्रकाश किसी वस्तु पर पड़ता है और वह वस्तु कुछ भी…
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