केंद्रीय मंत्री नड्डा से मिला CJP का प्रतिनिधिमंडल , धरना समाप्त करने की अपील

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के बीच सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। मुलाकात के बाद जेपी नड्डा ने प्रदर्शनकारियों से धरना समाप्त कर सामान्य स्थिति बहाल करने में प्रशासन का सहयोग करने की अपील की। वहीं सीजेपी ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलता तब तक आंदोलन जारी रहेगा। जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि सोमवार सुबह पहली बार प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार के साथ बातचीत का प्रस्ताव आया जिसके बाद सुबह 11 बजकर 50 मिनट से बातचीत शुरू हुई। उन्होंने बताया कि पहले प्रतिनिधिमंडल के साथ विस्तार से मौखिक चर्चा हुई और बाद में शाम करीब चार बजे उन्हें लिखित ज्ञापन सौंपा गया। उन्होंने कहा कि सभी प्रदर्शनकारियों से धरना समाप्त करने और सामान्य स्थिति बहाल करने का अनुरोध किया गया है।

मुलाकात के बाद सीजेपी प्रतिनिधि सौरभ दास ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री के समक्ष संगठन की प्रमुख मांगें रखीं जिनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा या उन्हें पद से हटाने की मांग प्रमुख है। उनके अनुसार मंत्री ने आश्वासन दिया है कि वह इस विषय पर उचित स्तर पर चर्चा करेंगे लेकिन कोई ठोस वादा नहीं किया गया है। इसलिए आंदोलन फिलहाल जारी रहेगा। सीजेपी द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि संगठन छह जून से शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहा है जबकि 20 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना जारी है। संगठन का दावा है कि पर्यावरणविद सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन से जुड़े और 28 जून से उनका अनशन जारी है।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं में कथित पेपर लीक तकनीकी गड़बड़ियां और प्रशासनिक अव्यवस्था सामने आई। संगठन ने यह भी दावा किया कि नीट 2026 पेपर लीक के बाद 21 अभ्यर्थियों ने आत्महत्या की। सीजेपी ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं जिनमें सोनम वांगचुक की रिहाई और उनके आवागमन पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने तथा कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग शामिल है। इसके अलावा संगठन ने दिल्ली पुलिस पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग का आरोप लगाते हुए ऐसी कार्रवाई तत्काल रोकने की भी मांग की है। हालांकि सरकार और संगठन के बीच बातचीत शुरू होने को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है लेकिन दोनों पक्षों के रुख में अभी भी दूरी बनी हुई है। सीजेपी ने दोहराया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती तब तक जंतर-मंतर पर उनका आंदोलन जारी रहेगा।