भारत-न्यूजीलैंड के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता , 2030 तक ₹35,000 करोड़ के लक्ष्य के साथ खुले बाजार, निर्यातकों को मिलेगा भारी लाभ
ऑकलैंड । भारत और न्यूजीलैंड ने अपने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नई गति देते हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफ़टीए) को तेजी से लागू करने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्समटन के बीच हुई वार्ता में साल 2030 तक आपसी व्यापार को दोगुना कर लगभग 35,000 करोड़ रुपये (7 बिलियन न्यूजीलैंड डॉलर) तक पहुंचाने का साझा संकल्प लिया गया है। यह समझौता दोनों देशों के व्यापारिक इतिहास में एक गेम-चेंजर के रूप में देखा जा रहा है, जो आर्थिक सहयोग के नए द्वार खोलेगा।
निर्यात शुल्क मुक्त और आसान सीमा शुल्क प्रक्रिया
समझौते के तहत, न्यूजीलैंड भारतीय उत्पादों पर 100 प्रतिशत निर्यात शुल्क हटा देगा, जिससे भारत के कपड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, चमड़ा और इंजीनियरिंग सेक्टर को बड़ी बढ़त मिलेगी। भारत भी न्यूजीलैंड के 95 प्रतिशत उत्पादों पर आयात शुल्क में भारी कटौती करेगा, हालांकि कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को विशेष सुरक्षा दी जाएगी। व्यापार को सुगम बनाने के लिए ‘प्राधिकृत आर्थिक ऑपरेटर’ (एईओ-एमआरए) व्यवस्था को लागू किया जाएगा, जिससे माल की आवाजाही में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
तकनीकी सहयोग और बेहतर कनेक्टिविटी
आर्थिक संबंधों के अलावा, दोनों देश बागवानी, पशुपालन और वानिकी जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान और तकनीकी आदान-प्रदान को बढ़ावा देंगे। पर्यटन और व्यापारिक यात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए सीधी उड़ान सेवाएं शुरू करने पर भी सहमति बनी है। इसके अतिरिक्त, नाविकों के प्रमाणपत्रों को आपसी मान्यता देने और स्वच्छ ऊर्जा के लिए वैश्विक बायोफ्यूल्स गठबंधन के साथ जुड़ने का निर्णय लिया गया है, जो भविष्य में दोनों देशों के बीच सामरिक और तकनीकी साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाएगा।