आईएनएस त्रिकंद ने फिर दिखाई ताकत, समुद्री डाकुओं की साजिश की नाकाम
-इस युद्धपोत की सबसे बड़ी ताकत सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल है
नई दिल्ली । अदन की खाड़ी में समुद्री डाकुओं के चंगुल से एक व्यापारी जहाज को सुरक्षित बचाने के बाद भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक युद्धपोत आईएनएस त्रिकंद एक बार फिर चर्चा में है। हालिया अभियान ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत अब केवल अपने समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभा रहा है।
हाल ही में अदन की खाड़ी में समुद्री डाकुओं ने व्यापारी जहाज एमवी गोल्डन आर्सेनल को निशाना बनाने की कोशिश की। संकट का संदेश मिलते ही क्षेत्र में तैनात आईएनएस त्रिकंद को तत्काल रवाना किया गया। युद्धपोत के पहुंचते ही भारतीय नौसेना की बोर्डिंग टीम ने जहाज की तलाशी ली और पूरे अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए चालक दल के सभी 21 सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया। इनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल था।
आईएनएस त्रिकंद वर्ष 2013 में भारतीय नौसेना में शामिल हुआ था। रूस के यंतर शिपयार्ड में निर्मित यह युद्धपोत वर्तमान में पश्चिमी नौसैनिक कमान के पश्चिमी बेड़े का हिस्सा है। इसका स्टील्थ डिजाइन इसे दुश्मन के रडार पर देर से दिखाई देने की क्षमता देता है, जबकि इसके आधुनिक सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली लंबी दूरी तक समुद्र, हवा और पानी के भीतर होने वाली गतिविधियों पर लगातार नजर रखती हैं।
इस युद्धपोत की सबसे बड़ी ताकत इसकी सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल है, जो समुद्र और जमीन दोनों पर मौजूद लक्ष्यों को बेहद कम समय में सटीकता से निशाना बना सकती है। इसके अलावा इसमें वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली, टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट, ए-190 मीडियम रेंज गन और 30 मिमी क्लोज-इन वेपन सिस्टम जैसे अत्याधुनिक हथियार भी लगे हैं। युद्धपोत का कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम विभिन्न सेंसर और हथियारों को एकीकृत कर एक साथ कई दिशाओं से आने वाले खतरों का सामना करने में सक्षम बनाता है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चार गैस टर्बाइन इंजनों से लैस आईएनएस त्रिकंद 30 नॉट्स यानी करीब 56 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से चल सकता है। इसके डेक पर कामोव-31 हेलीकॉप्टर भी तैनात किया जा सकता है, जो निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान तथा पनडुब्बियों की पहचान में अहम भूमिका निभाता है। भारतीय नौसेना 2008 से अदन की खाड़ी और अफ्रीका के पूर्वी तट पर समुद्री डकैती विरोधी अभियान चला रही है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक नौसेना अब तक 3,440 से ज्यादा व्यापारी जहाजों को सुरक्षित एस्कॉर्ट कर चुकी है और 25 हजार से ज्यादा नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर चुकी है। आईएनएस त्रिकंद बढ़ती समुद्री शक्ति और वैश्विक समुद्री सुरक्षा में उसकी मजबूत भूमिका का प्रतीक बन चुका है।