1.5 करोड़ श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए मथुरा प्रशासन मुस्तैद, गोवर्धन को 9 सुपर जोन में बांटा
मुड़िया पूर्णिमा मेला 2026 की समीक्षा: 23 से 30 जुलाई तक सजेगी आस्था की नगरी, 15 जुलाई तक काम पूरे करने की डेडलाइन
करंट से सुरक्षा के लिए बिजली के खंभों पर होगी प्लास्टिक रैपिंग, मेला क्षेत्र रहेगा पूरी तरह ‘प्लास्टिक मुक्त’
मथुरा । विश्व प्रसिद्ध मुड़िया पूर्णिमा मेला-2026 को भव्य, सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। आगामी 23 जुलाई से 30 जुलाई 2026 तक गोवर्धन में आयोजित होने वाले इस महामेले की तैयारियों को लेकर कलेक्ट्रेट सभागार में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार की संयुक्त अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सभी संबंधित विभागों को 15 जुलाई 2026 तक हर हाल में अपनी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने कहा कि वर्ष 2025 में 1.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु मुड़िया पूर्णिमा मेला में आए थे। इस बार भी भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए पुलिस और नागरिक प्रशासन श्रद्धालुओं, पर्यटकों और परिक्रमार्थियों की सुविधाओं हेतु पूरी तरह कटिबद्ध है। इस वर्ष मेले की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि इसे पूरी तरह ‘प्लास्टिक मुक्त मेला’ के रूप में मनाया जाएगा।
अपर जिलाधिकारी प्रशासन अमरेश कुमार ने बैठक में बताया कि सुरक्षा और व्यवस्था के दृष्टिकोण से पूरे मेला क्षेत्र को 09 सुपर जोन, 21 जोन तथा 62 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के लिए 31 वॉच टावर और 183 सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिन्हें पुलिस विभाग को हैंडओवर कर दिया गया है। इसके अलावा 3 सीसीटीवी मुख्य कंट्रोल रूम और 09 सब कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए जिलाधिकारी ने विद्युत विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। परिक्रमा मार्ग और मेला क्षेत्र के सभी विद्युत खंभों की प्लास्टिक रैपिंग की जाएगी ताकि बारिश के मौसम में करंट उतरने का कोई खतरा न रहे। सभी क्षतिग्रस्त खंभों को हटाकर नए पोल लगाए जाएंगे और ट्रांसफार्मर की उचित फेंसिंग व गार्डिंग की जाएगी। विभाग को अतिरिक्त (स्पेयर) ट्रांसफार्मर भी तैयार रखने को कहा गया है।
सड़क और परिवहन व्यवस्था को लेकर पीडब्ल्यूडी (PWD) को पार्किंग स्थलों, बैरिकेडिंग, वॉच टावर और पार्किंग के अंदर आने-जाने वाले रास्तों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। श्रद्धालुओं के पैरों में छाले न पड़ें, इसके लिए परिक्रमा मार्ग पर मिट्टी डलवाई जाएगी। इसके साथ ही जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि अन्योर सहित पूरे मेला क्षेत्र में कहीं भी जलभराव की समस्या नहीं होनी चाहिए और बड़े नालों की सफाई तुरंत पूरी की जाए।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए कि सभी 22 चिकित्सा शिविरों पर डॉक्टरों की 24 घंटे उपस्थिति सुनिश्चित हो। मेले में 05 मोटरसाइकिल एम्बुलेंस टीमें और 14 बड़ी एम्बुलेंस तैनात रहेंगी। आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी शिविरों और सरकारी व निजी अस्पतालों में एंटी-वेनम (सांप काटने की दवा) की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सुरक्षा बल: PAC फ्लड की 02 प्लाटून, SDRF की 01 टीम (मानसी गंगा पर) और PAC की 02 कंपनियां मुस्तैद रहेंगी।
परिवहन: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 1100 रोडवेज बसें और 54 गिर्राज मोबाइल वाहन चलेंगे। ई-रिक्शा चालकों के लिए नियम तय होंगे।
140 हैंडपंप, 30 पानी के टैंकर, 17 RO सिस्टम और 25 मोबाइल टॉयलेट लगाए जाएंगे।
गोवर्धन और राधाकुंड क्षेत्र को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त करने के लिए उप जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। मेले के दौरान त्वरित कार्रवाई के लिए एक इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम बनाया जाएगा, जिसमें स्वास्थ्य, पुलिस, बिजली, रोडवेज, अग्निशमन और नगर पंचायत सहित सभी विभागों के जिम्मेदार अधिकारी एक ही छत के नीचे बैठकर 24 घंटे मॉनिटरिंग करेंगे। मिलावटखोरों पर खाद्य सुरक्षा विभाग सख्त कार्रवाई करेगा, लेकिन कार्रवाई के नाम पर किसी भी व्यापारी या होटल संचालक का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।