नई दिल्ली । चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को संयुक्त पत्र भेजकर न्यायपालिका से हस्तक्षेप की मांग की है। कांग्रेस ने बताया कि 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद ने इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। पत्र में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया गया है कि एसआईआर प्रक्रिया के माध्यम से चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इसकी जानकारी देते हुए बताया कि विपक्षी गठबंधन की 8 जून 2026 को हुई बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई थी। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और एनसीपी (एसपी) नेता सुप्रिया सुले सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुए थे।
उन्होंने बताया कि हालांकि आम आदमी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) बैठक में शामिल नहीं हुए थे, लेकिन बाद में दोनों दलों ने भी मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए संयुक्त पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि इंडिया गठबंधन की बैठकें प्रत्येक दो माह में आयोजित की जाएंगी। अगली बैठक अगस्त में हैदराबाद में प्रस्तावित है।
चुनाव आयोग ने लगभग एक वर्ष पहले मतदाता सूचियों के सत्यापन और उन्हें अधिक सटीक बनाने के उद्देश्य से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान शुरू किया था। आयोग के अनुसार इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची से फर्जी, मृत और अयोग्य नाम हटाकर चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को मजबूत करना है। बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले 24 जून 2025 को इसका पायलट चरण शुरू किया गया था।
चुनाव आयोग के अनुसार इस अभियान के तहत अब तक देशभर में मतदाता सूचियों से लगभग छह करोड़ नाम हटाए जा चुके हैं। फिलहाल यह प्रक्रिया 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जारी है। बिहार में अकेले करीब 65 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया का उपयोग लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने और मतदाताओं को सूची से बाहर करने के लिए किया जा रहा है। इस मुद्दे पर विपक्षी नेताओं ने कई प्रेस वार्ताएं भी की हैं।
वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा है कि एसआईआर अभियान का उद्देश्य केवल अवैध घुसपैठियों और अयोग्य व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची से हटाना है। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी वास्तविक भारतीय नागरिक मतदाता सूची से बाहर न हो। उनके अनुसार जहां आवश्यक होगा वहां अवैध घुसपैठियों को विधिक प्रक्रिया के तहत हटाकर निर्वासन की कार्रवाई भी की जाएगी। इस बीच उच्चतम न्यायालय ने अपने हालिया फैसले में स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग को विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया संचालित करने का अधिकार प्राप्त है। न्यायालय ने मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ दायर आपत्तियों को भी खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद एसआईआर प्रक्रिया को कानूनी वैधता मिल चुकी है, हालांकि इसे लेकर राजनीतिक विवाद अभी भी जारी है।