अधिक मास में बृहस्पति के कर्क राशि प्रवेश से बनेंगे विवाह के शुभ योग

मथुरा । श्री दीपक ज्योतिष भागवत संस्थान के गोपाल गली स्थित कैंप कार्यालय पर आयोजित विद्वत गोष्ठी में ज्योतिषाचार्यों ने अधिक मास एवं बृहस्पति के राशि परिवर्तन के धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। गोष्ठी में संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य पंडित कामेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने कहा कि अधिक मास ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा 2 जून से बृहस्पति पुनर्वसु नक्षत्र के चतुर्थ चरण के आधार पर कर्क राशि में प्रवेश कर रहे हैं और 31 अक्टूबर तक इसी राशि में रहेंगे। इस अवधि में विवाह योग्य वर एवं कन्याओं के लिए सगाई तथा वैवाहिक संबंधों के शुभ योग बन रहे हैं।

उन्होंने बताया कि मेष, सिंह और धनु राशि के विवाह योग्य युवक-युवतियों को बृहस्पतिवार का व्रत, कथा एवं पूजा करनी चाहिए तथा पीले वस्त्र धारण करने चाहिए। इससे वैवाहिक संबंधों में सफलता प्राप्त होने की संभावना बढ़ती है। गोष्ठी में आचार्य ब्रजेन्द्र नागर एवं आचार्य शरद चतुर्वेदी ने कहा कि पुरुषोत्तम मास में ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा से अमावस्या तक प्रतिदिन भगवान शंकर का जलाभिषेक तथा शिव-पार्वती पूजन करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि विवाह योग्य युवक-युवतियों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी माना गया है।

ज्योतिषाचार्य पंडित दीपक चतुर्वेदी एवं ज्योतिषाचार्य पंकज चतुर्वेदी शास्त्री ने अधिक मास में धर्म-कर्म, पूजा-पाठ एवं अनुष्ठानों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह मास भगवान विष्णु और तुलसी पूजन के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। इस दौरान किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष पुण्य प्राप्त होता है। गोष्ठी में सौरभ शास्त्री, ऋषभ देव, गोविंद देव, मनोज पाठक, मनीष पाठक, निरंजन शास्त्री, नारायण प्रसाद शर्मा तथा अर्पित शास्त्री सहित अन्य विद्वानों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित गौरी स्तुति के पाठ से कन्याओं को सुयोग्य वर की प्राप्ति का विधान बताया गया है। साथ ही उच्च राशि में स्थित बृहस्पति के दौरान भगवान शिव एवं माता पार्वती की आराधना को विशेष फलदायी माना गया है। गोष्ठी का संचालन रामदास चतुर्वेदी शास्त्री ने किया। उन्होंने कहा कि अधिक मास में भगवान विष्णु एवं मां तुलसी की परिक्रमा का विशेष महत्व है और श्रद्धापूर्वक किए गए धार्मिक अनुष्ठान जीवन में सुख-समृद्धि एवं मंगलकारी फल प्रदान करते हैं।