​मथुरा में मिलावटखोरों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: घी और तेल के 11 नामी ब्रांडों के नमूने सील

प्रशासन की बड़ी कार्रवाई से तेल माफियाओं में हड़कंप, लैब भेजे गए फॉर्च्यून और गोवर्धन जैसे ब्रांड्स के सैंपल

​मथुरा । जनपद में मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ प्रशासन ने अब तक का सबसे बड़ा प्रवर्तन अभियान छेड़ दिया है। आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (लखनऊ) और जिलाधिकारी सीपी सिंह के सख्त निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मथुरा के विभिन्न कोनों में छापेमारी कर संदिग्ध घी और खाद्य तेल के नमूने भरे। इस औचक कार्रवाई से मिलावटखोरों और संबंधित कारोबारियों में दिनभर हड़कंप मचा रहा।

​सहायक आयुक्त (खाद्य) धीरेन्द्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने शहर से लेकर कस्बों तक सघन चेकिंग की। इस दौरान नामी ब्रांड्स के तेल और घी भी जांच के दायरे में आए।

​कोतवाली रोड से ‘फॉर्च्यून’ कच्ची घानी सरसों तेल और ‘गोवर्धन’ शुद्ध गाय के घी के नमूने लिए गए। सौंख व गोवर्धन क्षेत्र से ‘स्कूटर’ रिफाइंड, ‘पिंकसिटी’ सरसों तेल और ‘गुलाब प्लेटिनम’ मूंगफली तेल के सैंपल भरे गए।

​कोसीकलां व बाजना कस्बा से ‘राग गोल्ड’ पामोलिन, ‘बेस्ट चॉइस’ सोयाबीन तेल, ‘नाइस एन लाइट’ फैट स्प्रेड और ‘चांसलर’ सरसों तेल को जांच के लिए जब्त किया गया।

​बलदेव रोड से ‘विभोर’ रिफाइंड सोयाबीन तेल और ‘पिंकसिटी’ ग्राउंडनट ऑयल के नमूने संग्रहित किए गए ​इस व्यापक छापेमारी को अंजाम देने के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की अलग-अलग टीमें तैनात की गई थीं, जिनमें मुख्य रूप से भरत सिंह, मोहर सिंह कुशवाह, राम नरेश, जितेन्द्र सिंह, दलवीर सिंह और अरुण कुमार शामिल रहे। 

​”जनता की सेहत से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कुल 11 नमूने लेकर राजकीय प्रयोगशाला भेजे गए हैं। यदि रिपोर्ट में मिलावट की पुष्टि होती है, तो संबंधित विक्रेताओं और कंपनियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

​ प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद बाजार में संदिग्ध खाद्य तेलों की बिक्री पर फिलहाल सन्नाटा पसरा हुआ है। अब सभी की नजरें लैब रिपोर्ट पर टिकी हैं।