ब्रज के प्राचीन लोक गायक अज्ञानी का निधन

ध्रुवघाट पर हुआ अंतिम संस्कार, शुक्रवार को गुरुद्वारा अंतापाड़ा में होगी शोक सभा

मथुरा । ब्रज क्षेत्र की प्राचीन लोकविधा रांझा गायकी के एकमात्र प्रमुख गायक भगवान दास अज्ञानी का गुरुवार को निधन हो गया। वह पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की खबर से ब्रज क्षेत्र के सांस्कृतिक और संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

उनकी अंतिम यात्रा दोपहर में अंतापाड़ा (शंकर हलवाई वाली गली, होलीगेट) स्थित उनके निवास से ध्रुवघाट के लिए निकाली गई। अंतिम यात्रा होलीगेट और विश्राम घाट होते हुए श्मशान घाट पहुंची, जहां उनके बड़े पुत्र बांके बिहारी ने मुखाग्नि दी। इस दौरान कुंज बिहारी सहित परिवार के सदस्य, सामाजिक संस्थाओं के लोग और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। कलाकार देवेंद्र पाल ने बताया कि स्वर्गीय भगवान दास अज्ञानी भगत संगीत अखाड़ा के पगड़ीबंद खलीफा थे और आकाशवाणी के गायक कलाकार भी रह चुके थे। वह ब्रज की लोकगायन परंपरा के अंतिम प्रमुख रांझा गायक माने जाते थे। अपनी सिद्ध रांझा गायकी से उन्होंने बीमार पशुओं को ठीक करने का अनूठा रिकॉर्ड भी कायम किया था।

उनकी इस विशिष्ट लोक कला के लिए उन्हें क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र आगरा, भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) और ब्रज संस्कृति केंद्र मथुरा द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया जा चुका था। स्वर्गीय अज्ञानी की स्मृति में 13 मार्च को शाम 4 बजे अंतापाड़ा होलीगेट स्थित गुरुद्वारा में शोक सभा आयोजित की जाएगी। उनके निधन पर लोकेंद्र नाथ कौशिक, महेश जैन, देवेंद्र पाल, अनिल स्वामी, योगेश शर्मा, मुकेश पंडित, कमल पचौरी, साजन चतुर्वेदी, खेमचंद यदुवंशी, बुदाराम, अनिरुद्ध, सचिन मशीह, प्रेमलता राजपूत, रिशिता कुमारी, नीरज कुमार, वैभव सिंह सहित अनेक लोगों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।