नई दिल्ली । कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हमला बोलते हुए कहा है कि राष्ट्रपति का अभिभाषण एक औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह गया है, जिसमें पुराने दावों और वादों को दोहराया जाता है, लेकिन उनके क्रियान्वयन या जवाबदेही पर कोई चर्चा नहीं होती।
कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार द्वारा दिए गए ‘विकसित भारत’ के नारे पर सवाल उठाते हुए बुधवार को अपने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि यह नारा स्पष्ट लक्ष्यों, समय-सीमा और परिणामों के बिना सिर्फ एक राजनीतिक जुमला है। उनका आरोप है कि बिना ठोस रोडमैप के विकास की बात करना जनता को गुमराह करने के बराबर है।
श्री खरगे ने मनरेगा को लेकर भी केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने रोजगार की गारंटी देने वाले मनरेगा को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया है, जिससे करोड़ों गरीब और असंगठित श्रमिकों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। मनरेगा ग्रामीण गरीबों के लिए सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि सम्मान के साथ काम करने का अधिकार था। श्री खरगे ने सवाल उठाया कि ऐसा ‘विकसित भारत’ कैसा हो सकता है, जिसमें गरीबों से उनके जीविका के साधन छीने जाएँ और विकास को सिर्फ नारों तक सीमित कर दिया जाए।