वृंदावन: प्रेमानंद महाराज के शिष्यों की ‘गुंडागर्दी’ से बृजवासियों में भारी आक्रोश , क्या भक्ति के नाम पर मिलेगी अभद्रता की छूट?

​वृंदावन । भक्ति और प्रेम का संदेश देने वाले विख्यात संत प्रेमानंद महाराज के शिष्यों का व्यवहार अब स्थानीय लोगों के सब्र का बांध तोड़ रहा है। आए दिन बृजवासियों के साथ हो रही अभद्रता और मारपीट की घटनाओं ने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बाबा के इर्द-गिर्द रहने वाले ‘खास’ शिष्य खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं, जिससे वृंदावन के मूल निवासियों में गहरा रोष व्याप्त है।

​आग की घटना के दौरान भी नहीं सुधरा रवैया
​हाल ही में बाबा के फ्लैट के पास जब आग लगने की घटना हुई, तब मदद की जगह शिष्यों का अहंकार देखने को मिला। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आपदा के समय भी सेवादारों और शिष्यों ने वहां मौजूद लोगों के साथ बदतमीजी की। संकट की घड़ी में भी उनका व्यवहार संतों वाला नहीं, बल्कि बाहुबलियों जैसा था। ​जब प्रेमानंद महाराज अपनी पदयात्रा पर निकलते हैं, तो उनके शिष्यों का घेरा किसी सुरक्षा एजेंसी से भी ज्यादा कड़ा और आक्रामक होता है।

रास्ते में आने वाले स्थानीय श्रद्धालुओं और दुकानदारों के साथ गाली-गलौज और धक्का-मुक्की आम बात हो गई है। ​ शिष्यों का दोहरा चरित्र भी चर्चा का विषय है। एक तरफ वे खुद मोबाइल से वीडियो शूट करते हैं, लेकिन यदि कोई स्थानीय व्यक्ति या भक्त श्रद्धावश फोटो लेने की कोशिश करे, तो उसके साथ मारपीट और मोबाइल छीनने तक की नौबत आ जाती है।

​स्थानीय लोगों का स्पष्ट कहना है कि बाबा के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा है, लेकिन उनके नाम पर शिष्यों की ‘गुंडागर्दी’ अब बर्दाश्त नहीं होगी। बृजवासियों का बढ़ता यह आक्रोश किसी भी दिन एक बड़े हिंसक टकराव का रूप ले सकता है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि आश्रम की व्यवस्थाओं के नाम पर स्थानीय लोगों का उत्पीड़न बंद होना चाहिए।

​बृजवासियों की चेतावनी: >
“हम बाबा का सम्मान करते हैं, लेकिन उनके शिष्यों का अहंकार वृंदावन की परंपरा के खिलाफ है। अगर यही रवैया रहा, तो बृजवासी चुप नहीं बैठेंगे और इसका कड़ा विरोध किया जाएगा।” ​हैरानी की बात यह है कि सरेआम हो रही इन बदतमीजियों के बावजूद स्थानीय पुलिस और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। क्या बाबा की सुरक्षा के नाम पर आम नागरिक के सम्मान से खिलवाड़ करने की अनुमति दी जा सकती है? यह सवाल आज हर वृंदावन वासी पूछ रहा है।