ट्रंप का सख्त फरमान: ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर रहे कपल की हो रही कड़ी जांच

—अब सिर्फ शादी करने से नहीं मिलेगा ग्रीन कार्ड

वॉशिंगटन । अमेरिका में परमानेंट रेजीडेंसी यानी ग्रीन कार्ड को नागरिकता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाता है। यह अप्रवासियों को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देता है। हालांकि, ग्रीन कार्ड धारकों को अमेरिकी नागरिकों जैसे सभी अधिकार नहीं मिलते, फिर भी इसके लाभों के चलते इसकी मांग काफी अधिक रहती है।

अब तक ग्रीन कार्ड प्राप्त करने के लिए किसी अमेरिकी नागरिक से शादी को सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता था, लेकिन अब यह रास्ता पहले जितना आसान नहीं रहा। इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ अमेरिकी नागरिक से शादी करना अब परमानेंट रेजीडेंसी की गारंटी नहीं है।

अमेरिकी कानून के तहत किसी अमेरिकी नागरिक के पति या पत्नी को ‘निकट संबंधी’ माना जाता है, जिसके आधार पर वे यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) के माध्यम से ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, इमिग्रेशन वकीलों का कहना है कि आवेदन की योग्यता होना और उसे मंजूरी मिलना, दोनों अलग बातें हैं।

एक रिपोर्ट में इमिग्रेशन वकील ब्रैड बर्नस्टीन के हवाले से कहा गया है कि अब शादी के आधार पर ग्रीन कार्ड के आवेदनों की बहुत बारीकी से जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल शादी कर लेने से ग्रीन कार्ड नहीं मिल जाता। खासतौर पर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दौरान इस तरह की जांच प्रक्रिया और सख्त हो गई है।

बर्नस्टीन के अनुसार, अब अधिकारी शादी की कानूनी स्थिति से ज्यादा इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि क्या विवाह वास्तव में वास्तविक और ईमानदार है। ट्रंप प्रशासन ने इमिग्रेशन को लेकर कड़ी नीतियां अपनाई हैं, जिनमें डायवर्सिटी वीजा लॉटरी कार्यक्रम को निलंबित करना भी शामिल है, जिसके तहत हर साल लगभग 50 हजार अप्रवासियों को वीजा दिया जाता था।

उन्होंने बताया कि अब शादी के आधार पर ग्रीन कार्ड पाने के लिए साथ रहना एक निर्णायक फैक्टर बन गया है। बर्नस्टीन ने कहा, “सिर्फ रिलेशनशिप में होने से ग्रीन कार्ड नहीं मिलता, साथ रहने से मिलता है।” उन्होंने चेतावनी दी कि जो कपल शादी के बाद भी अलग-अलग रहते हैं, उनके आवेदन खारिज होने की संभावना सबसे अधिक रहती है।

उनके अनुसार, यदि पति-पत्नी एक ही घर में नहीं रहते, तो ग्रीन कार्ड का मामला पहले से ही कमजोर माना जाता है। इमिग्रेशन अधिकारी काम, पढ़ाई, आर्थिक या सुविधा संबंधी कारणों को अलग रहने की वैध वजह नहीं मानते। ऐसे मामलों में जोड़ों से सख्त पूछताछ की जाती है, शादी में धोखाधड़ी की आशंका जताई जाती है और कई बार आवेदन सीधे खारिज कर दिए जाते हैं।