वृंदावन। श्री बिहारी जी मंदिर में दर्शन पूजन के उपरांत राष्ट्रपति निधिवन राज मंदिर पहुंची। उनका मंदिर में पटका पहना कर स्वागत किया। खास बात यह है कि ठाकुर जी का आज रात का शयन श्रृंगार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की तरफ से किया जाएगा जिसकी सामग्री सेवायातो को भेंट की गई। राष्ट्रपति ने मंदिर में पहुंचकर स्विस कॉटेज के अंदर अपने जूते चप्पल उतरे उसके बाद उन्होंने ललिता कुंड के दर्शन किए। रंग महल में पूजा के लिए वह करीब 10 मिनट रुकी जहां उन्होंने संकल्प पूजा की। उसके उपरांत उन्होंने बंसी चोरी लीला स्थल को दिखा। राष्ट्रपति के संग उनकी बहन और बेटी-दामाद धेवते धेवती को मंदिर की ओर से चांदी की बांसुरी भेंट की गई।
देश की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को निधिवन पहुंचकर अपने आराध्य भगवान बांके बिहारी के दर्शन किए और मंदिर की व्यवस्थाओं तथा इतिहास के बारे में जानकारी ली।

उनको बताया गया कि निधिवन वृदावन का एक प्राचीन और पवित्र वन है, जिसे तुलसी का जंगल भी कहा जाता है। कहा जाता है कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण और राधा यहाँ रासलीला करने के उपरांत श्री रासलीला के बाद भगवान कृष्ण और राधा रंग महल में विश्राम करते थे। इस पवित्र स्थल का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि वहीं स्वामी हरिदास ने भगवान के दर्शन किए थे। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर कृष्ण और राधा ने बाके बिहारी की मूर्ति का रूप धारण किया जिसे बाद में मंदिर में स्थापित किया गया।
राष्ट्रपति को सेवायतों ने जानकारी दी कि निधिवन की पेड़ों की बनावट भी अनोखी है। यहाँ के पेड़ सीधे नहीं बल्कि नीचे की ओर झुकी हुई शाखाओं वाले हैं और रात में यह कहा जाता है कि ये पेड़ गोपियों का रूप धारण कर लेते हैं। शाम के बाद मानवों का यहाँ प्रवेश वर्जित है। माना जाता है कि रात में रास लीला होती है और रंग महल में सुबह बिस्तर अस्त व्यस्त पाए जाते हैं, जिससे पता चलता है कि यहाँ कोई देवीय गतिविधि हुई है। आधा घंटा रुकने के पश्चात राष्ट्रपति यहां से सुदामा कुटी के लिए प्रस्थान कर गयी।
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