महंगे होते सोने और बढ़ते फर्जीवाड़े को देखते हुए सरकार अब गोल्ड कॉइन यानी सोने के सिक्कों को लेकर नया नियम लाने जा रही है। इस प्रस्ताव के तहत अब सिर्फ BIS (Bureau of Indian Standards) से मान्यता प्राप्त टकसालों को ही गोल्ड कॉइन बनाने की इजाजत होगी। यानी अब कोई भी ज्वैलर अपने तरीके से सिक्के तैयार नहीं कर पाएगा।
क्यों उठाया गया ये कदम?
सिक्को का संग्रहण और अध्यन करने वाले बीकानेर के सुधीर लुणावत के अनुसार पिछले कुछ सालों में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची हैं। इसी के साथ देश भर नकली सोने के सिक्कों और वजन में हेराफेरी की शिकायतें भी बढ़ी हैं। कई बार ग्राहकों को पूरी शुद्धता और सही वजन वाला सिक्का नहीं मिलता। ऐसे में सरकार का ये कदम ग्राहकों की सुरक्षा और गोल्ड मार्केट में पारदर्शिता बढ़ाने के मकसद से उठाया जा रहा है।
ज्वेलर्स नहीं बना पाएंगे ‘अपने हिसाब’ के सिक्के
अभी तक कई ज्वेलर्स खुद ही अपने तरीके से गोल्ड कॉइन बना लेते हैं और बेचते हैं। इन पर न तो कोई स्टैंडर्ड मार्किंग होती है, न ही इनकी शुद्धता की गारंटी लेकिन नए नियम लागू होने के बाद ऐसा नहीं हो पाएगा। अब सभी गोल्ड सिक्के सिर्फ अधिकृत टकसालों में BIS की निगरानी में तैयार होंगे और उन पर स्टैंडर्ड हॉलमार्क जरूर होगा।
स्टेकहोल्डर्स से चल रही है बातचीत
सरकार इस पूरे प्रस्ताव पर स्टेकहोल्डर्स यानी ज्वेलर्स, उपभोक्ता संगठनों, विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों से बातचीत कर रही है। ये कंसल्टेशन जल्द पूरा होने की उम्मीद है। उसके बाद प्रस्ताव को मंजूरी के लिए आगे बढ़ाया जाएगा। माना जा रहा है कि यह नियम लागू होते ही गोल्ड मार्केट में कई स्तर पर बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
ग्राहकों को क्या होगा फायदा?
नया नियम लागू होने से सबसे बड़ा फायदा ग्राहकों को होगा। उन्हें अब हर सिक्के पर BIS का स्टैंडर्ड मिलेगा, जिससे यह तय रहेगा कि सोने की शुद्धता और वजन में कोई गड़बड़ी नहीं है। इससे भरोसे के साथ सोने के सिक्के खरीदे जा सकेंगे और फिर से बेचने पर भी वैल्यू बनी रहेगी।
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