भारतीय सामाजिक, शैक्षिक, क्रांति के अग्रदूत महात्मा ज्योतिबा फुले का जन्म 11 अप्रैल 1827 को महाराष्ट्र की सतारा जनपद में जोतबा देवता के उत्सव दिवस पर हुआथा। महाराष्ट्र के अंदर 19वीं सदी में महात्मा ज्योतिबा फुले द्वारा सामाजिक शैक्षिक महिला दलित उत्थान हेतु अनेकों कार्य किए गए। महात्मा ज्योतिबा फुले के द्वारा 21 वर्ष की अल्प आयु में 1848 में पुणे के भिड़े की हवेली में पहली कन्या पाठशाला खोलकर स्त्री शिक्षा के द्वार खोल दिए गए। महात्मा ज्योतिबा फुले एवं उनकी सहधर्मिणी सावित्रीबाई फुले ने 17 विद्यालयों की श्रृंखला खोलकर समाज के प्रत्येक वर्ग को शिक्षित करने का भागीरथी प्रयास किया। महात्मा फुले ने विधवा मुंडन की प्रथा को बंद कराया इस हेतु 1890 में 500 नाईयों की सभा में मुंडन बंद करने का प्रस्ताव मुंबई में कराया। महात्मा फुले ने अवैध संतानों की हत्या बंद करने का संकल्प लेकर बाल हत्या प्रतिबंधक गृह की स्थापना की इसी बाल हत्या प्रतिबंधक गृह में विधवा काशीबाई की संतान को फूले दंपति द्वारा गोद लिया गया। फूले के द्वारा समाज में समता की स्थापना हेतु पानी के कुएं सर्व समाज के लिए खोल दिए। भारत में देवदासी प्रथा का बड़ा प्रभाव था जिसमें बेटियों की शादी भगवान से कर दी जाती थी इस कुप्रथा को बंद करने का शुभारंभ महात्मा ज्योतिबा फुले द्वारा किया गया।
फूले ने मद्यपान का विरोध किया इसके संबंध में अंग्रेज अधिकारी प्लेन्केट से पत्राचार किया। धर्मभीरुजन स्वामी दयानंद के द्वारा भारत वर्ष में मानवीय मूल्यों के प्रचार प्रसार का विरोध करते थे। पुणे के समाज सुधारक स्वामी दयानंद की शोभा यात्रा निकालना चाहते थे जिसका कट्टरपंथी विरोध कर रहे थे स्वामी दयानंद की शोभा यात्रा को निकलवाने में महात्मा फुले द्वारा मदद कर यात्रा को सफल रूप में निकलवाया। 1870 में देश में भयंकर अकाल पड़ा जिसमें लगभग 2 करोड़ लोग भूख से मर गए ऐसे समय महात्मा फुले द्वारा सामाजिक सहायता से अन्न सत्र चलाया जिसका लाभ हजारों बालकों ने उठाया। साहूकारी प्रथा के विरुद्ध किसान आंदोलन का नेतृत्व महात्मा फुले ने किया किसान आंदोलन को दबाने के लिए तत्कालीन सरकार को सेना की सहायता लेना पड़ी इसी आंदोलन के फलस्वरूप 1879 में किसान राहत कानून बनाया गया। 19वीं सदी में मिल श्रमिकों को 14 घंटे काम करना होता था। महात्मा फुले के सत्यशोधक समाज ने मिल आंदोलन का नेतृत्व कर साप्ताहिक अवकाश रविवार का तय कराया तथा काम की घंटे घटाने का कार्य किया।
सत्यशोधक समाज की स्थापना कर महात्मा फुले ने सत्यशोधक समाज की प्रतिज्ञा में लिखा कि सारे मानव ईश्वर की संताने हैं सभी आपस में भाई-बहन हैं अपने बेटे ,बेटियों को शिक्षित करूंगा। सत्यशोधक समाज का उद्देश्य महिला शिक्षा देना महिलाओं के मानव अधिकारों को संरक्षण प्रदान करना। दीनहीन भिक्षुओं अपाहिजों हैं के प्रति सहानुभूति रखना। मानसिक धार्मिक गुलामी से मुक्ति ,शिक्षा का प्रचार प्रचार करना ,सत्य आचरण और सत्य निष्ठा को अपनाना समाज जाति पाँति , अस्पृश्यता, धार्मिक संकीर्णता एवं शोषण के विरुद्ध है। महात्मा फुले 19वीं सदी के महानायक रहे जिन्होंने अपना सारा जीवन किसान मजदूर महिला दलित उद्धार में लगा दिया। आज किसान मजदूर महिला दलित के जीवन में प्रकाश दृष्टिगोचर होता है उसका विचार रूपी बिरवा का रोपण हात्मा फुले ने किया था।
- डॉ कमल कौशिक
लेखक – महात्मा ज्योतिबा फुले के जीवन पर शोध कर्ता