नई दिल्ली, 06 सितंबर (वेब वार्ता)। उच्चतम न्यायालय ने मुजफ्फरनगर जिले के एक निजी स्कूल में एक मुस्लिम नाबालिग छात्र को थप्पड़ मारने के मामले में दर्ज प्राथमिकी पर बुधवार को सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया।
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने बुधवार को महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और संबंधित पुलिस अधीक्षक से जांच की स्थिति और रिपोर्ट अदालत में दायर करने का आदेश दिया।
शीर्ष अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 सितंबर की तारीख मुकर्रर की है।
इस सनसनीखेज घटना के वायरल वीडियो में कथित तौर पर कक्षा के शिक्षक को अन्य छात्रों को एक मुस्लिम साथी छात्र को थप्पड़ मारने के लिए प्रोत्साहित करते हुए दिखाया गया, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
इस साल 24 अगस्त को एक ‘परेशान करने वाला वीडियो’ सामने आया, जिसमें मुज़फ़्फ़रनगर के एक गाँव में नेहा पब्लिक स्कूल में साथी छात्रों द्वारा सात साल के एक किशोर को उनकी शिक्षिका/स्कूल की प्रिंसिपल तृप्ति त्यागी के निर्देशों पर कथित तौर पर थप्पड़ मारा गया था। बताया गया कि इसकी वजह उस पीड़ित छात्र की गुणन सारणी गलत थी।
वकील शादान फरासत द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि सात वर्षीय किशोर ने शिकायत की कि वह परेशान महसूस कर रहा है और घटना के बाद सो नहीं पा रहा है। याचिका में उन सभी प्रावधानों के संबंध में प्राथमिक दर्ज करने सहित समयबद्ध और स्वतंत्र जांच के निर्देश देने की मांग की गई है, जहां प्रथम दृष्टया अपराध होने का खुलासा हो।
विशेष रूप से किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम की धारा 82, 2015, मुजफ्फरनगर में एक सात वर्षीय किशोर के साथ हुए अत्याचार का हालिया मामला। याचिका में दावा किया गया,“मुजफ्फरनगर के नेहा पब्लिक स्कूल में घटी भयानक घटना का उन विद्यार्थियों पर भी घातक प्रभाव पड़ा है, जो इसे देखते हैं, जिससे भय, चिंता, असहिष्णुता और ध्रुवीकरण का माहौल बनता है, जो सीखने के लिए असंगत है।
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