मथुरा में धूमधाम से मनी भारत के मंदिरों की महारानी अहिल्याबाई होल्कर की 298 वीं जयंती

महारानी की जयंती पर माल्यार्पण कर निकाली शोभायात्रा
मथुरा। राजमाता अहिल्याबाई होल्कर की 298 वीं जयंती डैंपियर नगर स्थित अहिल्याबाई होल्कर पार्क में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर धनगर समाज के वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान करके शहर में शोभायात्रा निकाली।
कार्यक्रम में रणबीर सिंह धनगर ने कहा कि धनगर वंशीय मनकोजी शिंदे की पुत्री इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर ने 28 वर्ष के शासन काल में मुगल शासक औरंगजेब के द्वारा तोड़े गए केदार नाथ, बद्रीनाथ, श्रीनगर, हरिद्वार, प्रयाग वाराणशी, पुरी, रामेश्वरम, सोमनाथ, महाबलेश्वर , पुणे, इंदौर, उडुपी, गौकर्ण, काठमांडू आदि मन्दिरों का पुनः निर्माण कराया। इसके अलावा कुआ, बाबरी, श्रीकृष्ण जन्मस्थान, वृन्दावन के घाटों का निर्माण में भी उनका उल्लेख है। वृन्दावन में चैन बिहारी मंदिर होल्कर वंश की विरासत के रूप में आज भी विद्धमान है।
डॉ. रमेश चन्द धनगर ने कहा कि महारानी अहिल्याबाई होल्कर न्याय की देवी और शिक्षा प्रिय थीं। उन्होंने नारी शक्ति को शिक्षा एवं सैन्य प्रशिक्षण के लिए प्रेरित किया और नारी सेना का गठन किया। कार्यक्रम के संयोजक हरिओम धनगर ने बताया कि मातारानी की शोभायात्रा में घोड़े, ऊंट एवं बैंड बाजे भी शामिल थे। मुख्य वक्ता सतीश बघेल ने कहा कि अहिल्यबाई का जीवन बहुत ही साधारण तरीके से गुजरा। वह मराठा समुदाय के होलकर राजघराने की बहु बनी और 18 वीं सदी में मालवा प्रांत की रानी बनीं।
मंच संचालन हरिओम धनगर ने किया । समारोह में मुकेश धनगर, धीरेन्द्र कुमार, हरी कृष्ण, स्वतंत्र सिंह , रूपेश धनगर, डी सी वर्मा, आनंद धनगर एवं अन्य धनगर समाज के लोग उपस्थित रहे।