मथुरा में सीईपीटी के आधुनिकीकरण को लेकर डेढ़ दर्जन बड़ी फैक्ट्रियों की बिजली सप्लाई कटी, प्रदूषण विभाग के खिलाफ आंदोलन प्रारंभ
मथुरा। प्रदूषण नियंत्रण संयंत्र (एसटीपी) के आधुनिकीकरण के नाम पर मथुरा के प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने इंडस्ट्रियल एरिया साइट ए स्थित 16 फैक्ट्रियों की बिजली कटवा दी है। इन फैक्ट्रियों की बिजली सप्लाई कटने से सैकड़ों मजदूरो के रोजगार पर संकट गहराया गया जिसके परिप्रेक्ष्य में मंगलवार को मजदूरों ने प्रदूषण विभाग के ऑफिस पर धरना प्रदर्शन किया। धरना प्रदर्शन में काफी संख्या में पीड़ित लोग मौजूद रहे।
नमामि गंगे योजना के अंतर्गत साईट ए में बने एसटीपी प्लांट का साढे 13 करोड रुपए की धनराशि से आधुनिकीकरण किया जा रहा है। प्रदूषण विभाग ने आधुनिकीकरण की कार्रवाई तक डेढ़ दर्जन फैक्ट्रियों की बिजली सप्लाई कटवा दी है। आक्रोशित मजदूरों के अलावा फैक्ट्री मालिकों का कहना है कि शहर के मसानी क्षेत्र में चल रही फैक्ट्रियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई जबकि उनका प्रदूषित जल सीधे यमुना जी में जा रहा है। इसी प्रकार गाजियाबाद के साहिबाबाद इंडस्ट्रियल एरिया की फैक्ट्रियों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है वहां भी और दूषित जल सीधा यमुना जी में बह रहा है । समाजसेवी मिलन भाटिया का आरोप है कि ये कार्यवाही प्रदूषण विभाग के अधिकारियो ने दुर्भावना से ग्रस्त होकर की है। इनके द्वारा नाजायज धन की मांग की गयी न देने पर बिजली सप्लाई कटवाई गयी है। उन्होंने बिजली अधिकारियो पर भी आरोप लगाया है की 18 फैक्ट्रियों की लाइट काटने की सूची प्रदूषण विभाग ने भेजी थी उसमे राजश्री फैक्ट्री का भी नाम था उसकी लाइट नहीं काटी गयी। बताया जाता है मथुरा जिले में कई अन्य स्थान पर भी ये कार्यवाही गयी है।
मथुरा साडी उद्योग मसानी के संरक्षक राजेश बजाज का कहना है कि मसानी क्षेत्र में 90% फैक्ट्रियों में ईटीपी प्लांट लग चुका है और ट्रायल बेस चल रहा है। इस क्षेत्र में भी 11 फैक्ट्रियों को बंद करने के आदेश जारी किए गए हैं जो सरासर न्यायोचित नहीं है। श्री बजाज का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को मथुरा के सभी फैक्ट्री संचालकों के साथ मीटिंग करके आगे की कार्रवाई को अंजाम देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रदूषण नियंत्रण विभाग अव्यवहारिक एकतरफा कार्रवाई करता रहा तो मथुरा में बड़ा जन आंदोलन हो सकता है।