नगर निगम बोर्ड बैठक में जमकर हंगामा; महापौर की अनुपस्थिति पर भड़के पार्षद, खूब लगे नारे
34 प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित, 70 वार्ड में 50- 50 लाख रुपए के विकास कार्य होंगे, सफाई कर्मियों की भर्ती के प्रस्ताव भी स्वीकृत
मथुरा। मंगलवार को नगर निगम की बोर्ड बैठक में भारी हंगामे के बीच महापौर विनोद अग्रवाल की अनुपस्थिति को लेकर पार्षदों का गुस्सा फूट पड़ा। पार्षदों ने बैठक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे केवल औपचारिकता निभाने वाला आयोजन करार दिया। सदन में मौजूद पार्षदों का कहना था कि जब शहर के विकास से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और निर्णय होना है, तब महापौर की गैरमौजूदगी कई सवाल खड़े करती है। पहले ये बैठक पार्षदों के साथ विचार विर्मश के लिए बुलाई गयी थी , इस दौरान इसी बैठक को बोर्ड की बैठक का रूप दे दिया गया। बोर्ड बैठक में 34 प्रस्ताव रखे गए जिनको सर्वसम्मति से पारित किया गया। सभी पार्षदों की मांग पर 70 वार्ड में 50-50 लाख रुपए के विकास कार्य स्वीकृत किए गए । इसके अलावा डूडा के माध्यम से सफाई कर्मियों की भर्ती के प्रस्ताव को भी स्वीकृत कर लिया गया है जिसको शासन को भेजा जाएगा वहां से अनुमति मिलने के बाद कार्रवाई प्रारंभ कर दी जाएगी।
बैठक के दौरान पार्षदों ने अपने-अपने क्षेत्रों में रुके पड़े विकास कार्यों का मुद्दा प्रखरता से उठाया। पार्षदों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2025 के स्वीकृत और प्रस्तावित विकास कार्य अब तक पूरी तरह से अटके पड़े हैं। किसी भी वार्ड में अपेक्षा के अनुरूप बुनियादी सुविधाएं या निर्माण कार्य नहीं हो पा रहे हैं। इस प्रशासनिक सुस्ती के कारण क्षेत्रीय जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जबकि सड़कों पर उतरने वाले पार्षदों को जनता के सवालों और तीखे आक्रोश का सामना करना भारी पड़ रहा है।
सदन की कार्रवाई के दौरान पार्षदों ने नगर निगम प्रशासन के रवैये पर पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने सर्वसम्मति से मांग रखी कि केवल एक या दो वार्डों के प्रस्ताव पास करके बाकी क्षेत्रों की अनदेखी करने का तरीका पूरी तरह गलत है। नगर निगम प्रशासन को शहर के सभी वार्डों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। पार्षदों ने मांग की कि सभी वार्डों के विकास प्रस्तावों को एक साथ पारित किया जाए और लंबे समय से लंबित पड़े निर्माण व रखरखाव के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए।
महापौर विनोद अग्रवाल की गैरमौजूदगी में बोर्ड बैठक की अध्यक्षता उपसभापति मुकेश सारस्वत ने की। पार्षदों के तीखे तेवरों और हंगामे के बीच उन्होंने सदन को शांत कराने का प्रयास किया। इस दौरान नगर आयुक्त ओजस्वी राज भी बैठक में मौजूद रहे, जिन्होंने पार्षदों द्वारा उठाए गए मुद्दों और लंबित विकास प्रस्तावों को ध्यानपूर्वक सुना व संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
बैठक की शुरुआत होते ही पार्षदों ने महापौर की गैरमौजूदगी पर एतराज जताया। नाराज जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि जब शहर के विकास से जुड़े करोड़ों रुपये के प्रस्तावों और जनसमस्याओं पर निर्णय होना है तो महापौर का बैठक से नदारद रहना जनता के मुद्दों के प्रति गंभीरता की कमी दर्शाता है। पार्षदों ने सवाल किया कि क्या यह बैठक वास्तव में विकास के लिए बुलाई गई है या महज औपचारिकता पूरी करने की कवायद है।
हंगामे के दौरान पार्षदों ने वर्ष 2025 से लंबित पड़े विकास कार्यों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास प्रस्तावों की फाइलें लंबे समय से धूल फांक रही हैं। सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जनता परेशान है। हालात यह हैं कि पार्षदों को अपने क्षेत्रों में जनता के सवालों का जवाब देना मुश्किल हो रहा है। अधिकारियों की शिथिलता के चलते स्वीकृत योजनाएं भी धरातल पर नहीं उतर पा रही हैं।
पार्षद मुन्ना मलिक ने कहा कि वार्ड-31 के साथ विकास कार्यों में भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गंगाजल आपूर्ति शुरू कराने, आजाद मार्केट का पुनर्निर्माण और बलभद्र कुंड के सौंदर्यीकरण सहित लंबित कार्यों को तत्काल पूरा कराया जाए। काम शुरू नहीं करने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई हो और सफाई कर्मचारियों की तैनाती की जाए। उन्होंने मीट बिक्री पर प्रतिबंध का विरोध करते हुए कहा कि व्यापारियों की रोजी-रोटी छीनने के बजाय उनके लिए व्यवस्थित वेंडिंग जोन बनाया जाए। उन्होंने बताया कि राधिका धाम पार्क का नाम महाराजा अग्रसेन पार्क किया जाए जिस प्रस्ताव को स्वीकृत कर लिया गया
बैठक में पक्ष और विपक्ष के पार्षदों ने एकजुट होकर सभी वार्डों में समान विकास की मांग उठाई। उन्होंने विकास कार्यों में भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि बजट का आवंटन किसी एक क्षेत्र तक सीमित न रहकर शहर के प्रत्येक वार्ड में पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए। पार्षदों ने कहा कि सभी वार्डों की समस्याओं को समान प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
पार्षदों ने चेतावनी दी कि यदि बोर्ड बैठकों को केवल औपचारिकता तक सीमित रखा गया और लंबित विकास कार्यों को गति नहीं दी गई तो नगर निगम परिसर में उग्र आंदोलन और प्रदर्शन किया जाएगा। नगर आयुक्त ओजस्वी राज सहित निगम के अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। पार्षदों के विरोध और हंगामे के बीच अधिकारियों ने लंबित मामलों का जल्द निस्तारण कराने का आश्वासन दिया। समाचार लिखे जाने तक बैठक जारी थी।