150 साल पुरानी परंपरा में सजे आस्था के रंग, स्वर्ण मुकुट से हुआ भव्य स्वागत

दतिया राजपरिवार की मौजूदगी में मड़ोई गांव का पुण्यतिथि समारोह बना आकर्षण का केंद्र

मथुरा । ग्राम मड़ोई में लगभग 150 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक परंपरा के तहत पुण्यतिथि समारोह श्रद्धा, आस्था और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में दतिया (मध्य प्रदेश) के राजपरिवार के वंशज एवं विधायक राजा घनश्याम सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि कुंवर नरेंद्र सिंह वरिष्ठ अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

समारोह की पृष्ठभूमि में एक प्राचीन आस्था जुड़ी हुई है। आयोजकों के अनुसार, दतिया के महाराज भवानी सिंह को संतान प्राप्ति नहीं हो रही थी। उस समय वरिष्ठ अधिवक्ता नंद किशोर उपमन्यु के परबाबा, जो ज्योतिष एवं आध्यात्मिक विद्या में पारंगत थे, उन्होंने महाराज को बीज मंत्र प्रदान किया। इसके पश्चात महाराज भवानी सिंह को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिसे इस परंपरा की आधारशिला माना जाता है।

इस कृतज्ञता के प्रतीक के रूप में महाराज भवानी सिंह के पौत्र महाराज गोविंद सिंह ने अपने जीवनकाल में सवा पांच किलोग्राम वजनी स्वर्ण मुकुट बनवाकर मंदिर की गद्दी पर अर्पित किया था। तभी से यह मुकुट परंपरा का अभिन्न अंग बना हुआ है और प्रत्येक वर्ष पुण्यतिथि पर इसका विशेष पूजन किया जाता है।

इसी परंपरा के निर्वहन में आयोजित समारोह के दौरान मुख्य अतिथि राजा घनश्याम सिंह के आगमन पर मंदिर के सेवायतों एवं श्रद्धालुओं ने सवा पांच किलोग्राम के स्वर्ण मुकुट से उनका पारंपरिक स्वागत किया। इसके बाद श्री राधा-कृष्ण मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं ग्रामीण मौजूद रहे।

अपने संबोधन में राजा घनश्याम सिंह ने इस ऐतिहासिक परंपरा को जीवंत बनाए रखने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता नंद किशोर उपमन्यु सहित सभी आयोजकों, सेवायतों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसी परंपराएं हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं, जिन्हें संजोकर रखना समाज की जिम्मेदारी है।

समारोह में कुंवर नरेंद्र सिंह की गरिमामयी उपस्थिति भी विशेष आकर्षण रही। उल्लेखनीय है कि आवागढ़ और दतिया राजपरिवार के बीच लंबे समय से आत्मीय संबंध रहे हैं, जिसके चलते दोनों राजपरिवारों की सहभागिता ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।