नई दिल्ली । विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों और उठ रहे सवालों के बीच आयोग ने बुधवार को प्रेस नोट जारी कर अपना पक्ष स्पष्ट किया। आयोग ने कहा कि वह संविधान के तहत काम करने वाली बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था है और उसके भीतर अलग-अलग राय सुझाव तकनीकी टिप्पणियां तथा आंतरिक विचार-विमर्श सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक उसके सभी अंतिम फैसले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और आयोग के नियमों के तहत लिए गए हैं।
आयोग ने कहा कि किसी निर्णय को अंतिम रूप देने से पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों के बीच चर्चा होती है। इस दौरान अलग-अलग सुझाव या प्रशासनिक और तकनीकी सवाल सामने आना स्वाभाविक है। आयोग के अनुसार ऐसी टिप्पणियों का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाना और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना है। केवल आंतरिक टिप्पणियों को आधार बनाकर इन्हें संस्थागत मतभेद के रूप में देखना पूरी तस्वीर पेश नहीं करता।
आयोग ने पिछले 10 महीनों के दौरान सामने आए चुनिंदा आंतरिक नोट्स को लेकर भी सफाई दी। उसका कहना है कि कुछ टिप्पणियों को अलग से सामने रखने से उसके पूरे कामकाज की तस्वीर स्पष्ट नहीं होती। आयोग के मुताबिक इस अवधि में बड़ी संख्या में मंजूरियां फैसले और निर्देश जारी किए गए तथा करीब 40 नई पहल शुरू की गईं। इनमें मतदाता सूची के संशोधन की प्रक्रिया और एसआईआर भी शामिल है। आयोग ने दावा किया कि पिछले एक साल में लिए गए सभी अंतिम फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से हुए हैं।
एसआईआर को लेकर आयोग ने कहा कि बिहार के साथ केरल तमिलनाडु पुडुचेरी असम और पश्चिम बंगाल में चुनाव तथा चुनाव संबंधी प्रक्रियाओं के दौरान व्यापक प्रशासनिक तैयारियां की गईं। आयोग के अनुसार इन प्रक्रियाओं में आवश्यक मंजूरियां और निर्देश पूर्ण आयोग की प्रक्रिया के तहत जारी किए गए। आयोग ने कहा कि कुछ आंतरिक टिप्पणियों के आधार पर उसके पूरे कामकाज का आकलन करना उचित नहीं होगा।
मतदाता सूची के आंकड़ों और डिजिटल व्यवस्था पर भी आयोग ने स्थिति स्पष्ट की। आयोग के मुताबिक ईसीआईनेट जैसे डिजिटल मंच सख्त डेटा सुरक्षा व्यवस्था के तहत संचालित होते हैं। अनधिकृत बदलाव या छेड़छाड़ रोकने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी सुरक्षा जांच और लेखा परीक्षण की व्यवस्था लागू है। आयोग ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का अधिकार निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी और जिला निर्वाचन अधिकारी जैसे वैधानिक अधिकारियों के पास होता है और वे कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इसका इस्तेमाल करते हैं।
आयोग ने कहा कि वह संविधान के तहत मिली जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ कर रहा है। उसका कहना है कि आंतरिक विचार-विमर्श लोकतांत्रिक संस्थाओं की सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा है और अंतिम निर्णय सामूहिक प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं। एसआईआर को लेकर उठे सवालों के बीच आयोग ने अपने फैसलों की वैधानिकता और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया पर जोर दिया है।