हिंदी दिवस के अवसर पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से शुरू की गई ‘जन सूचना सेवा’ न्याय व्यवस्था को आम नागरिक के और करीब लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। अदालतों के फैसले अक्सर कानूनी शब्दावली और जटिल भाषा में लिखे जाते हैं। ऐसे में जिस व्यक्ति के अधिकार, संपत्ति, रोजगार, शिक्षा या परिवार से जुड़ा फैसला होता है, उसके लिए यह समझना आसान नहीं होता कि अदालत ने वास्तव में क्या कहा और उसका उसके जीवन पर क्या असर पड़ेगा। न्याय मिलना जितना जरूरी है, न्याय के फैसले को समझ पाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ‘जन सूचना सेवा’ के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट के चुनिंदा महत्वपूर्ण आदेशों और फैसलों का सरल हिंदी में सार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे न्यायालय की भाषा और आम नागरिक की समझ के बीच की दूरी कम होगी। खास बात यह है कि इस सेवा में केवल लिखित सामग्री ही नहीं बल्कि हिंदी में ऑडियो और वीडियो बुलेटिन भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे कम पढ़े-लिखे और कानूनी भाषा से अपरिचित लोगों के लिए न्यायिक फैसलों को समझना आसान हो सकेगा।
दरअसल न्यायालय का फैसला महज कागज पर दर्ज कुछ कानूनी शब्द नहीं होता। उसके पीछे किसी व्यक्ति के अधिकार, वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई और परिवार की उम्मीदें जुड़ी होती हैं। इसलिए फैसला सुनाए जाने के बाद उसका सरल अर्थ संबंधित व्यक्ति तक पहुंचना भी न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अभी स्थिति यह है कि सामान्य नागरिक अपने ही मामले से जुड़े फैसले की भाषा समझने के लिए वकील या दूसरे कानूनी जानकारों पर निर्भर रहता है। आर्थिक और मानसिक दबाव झेल रहे व्यक्ति के लिए यह अतिरिक्त बोझ भी बन जाता है। सरल भाषा में फैसले की जानकारी इस निर्भरता को कुछ हद तक कम कर सकती है। भारत जैसे विशाल और भाषाई विविधता वाले देश में इसका महत्व और बढ़ जाता है। देश में अनेक भाषाएं और बोलियां हैं। ऐसे में न्यायिक जानकारी केवल अंग्रेजी या जटिल कानूनी भाषा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की ओर से हिंदी के बाद अन्य भारतीय भाषाओं में भी इस सुविधा को विस्तार देने की दिशा में काम किया जाना इस प्रयास को और व्यापक बना सकता है। न्याय सबके लिए समान है तो न्याय की जानकारी भी नागरिक की समझ की भाषा में उपलब्ध होनी चाहिए।
हिंदी दिवस पर भाषा को लेकर होने वाली चर्चा का दायरा भी केवल हिंदी के प्रचार तक सीमित नहीं रहना चाहिए। भाषाई विविधता भारत की ताकत है। विभिन्न भाषाओं और बोलियों के शब्दों को समृद्ध हिंदी में स्थान देना और भारतीय भाषाओं के बीच संवाद बढ़ाना भाषा को अधिक जनसुलभ बनाता है। शासन, प्रशासन और न्याय के क्षेत्र में सरल भारतीय भाषाओं का प्रयोग बढ़ना लोकतांत्रिक भागीदारी के लिए भी उपयोगी है। हालांकि यह भी स्पष्ट रहना चाहिए कि किसी फैसले का सरल सार कानूनी सलाह का विकल्प नहीं हो सकता। जटिल मामलों में वकील और कानूनी विशेषज्ञ की आवश्यकता बनी रहेगी। लेकिन प्रत्येक नागरिक को इतना जानने का अधिकार अवश्य होना चाहिए कि अदालत ने उसके या उसके हित से जुड़े मामले में क्या निर्णय दिया है। इस बुनियादी जानकारी के लिए भाषा की दीवार नहीं होनी चाहिए। डिजिटल माध्यमों ने शासन और प्रशासन की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के तरीके को बदल दिया है। इसी बदलाव के बीच न्यायिक फैसलों को सरल भाषा और ऑडियो-वीडियो माध्यमों से जनता तक पहुंचाना समय की जरूरत भी है। इससे कानूनी जागरूकता बढ़ेगी और नागरिक अपने अधिकारों तथा न्यायिक व्यवस्था को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। ‘जन सूचना सेवा’ का वास्तविक महत्व इसी में है कि यह न्याय को केवल अदालत के कक्ष से निकालकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास करती है। न्याय की गरिमा और कानूनी शुद्धता बनाए रखते हुए यदि उसकी जानकारी ऐसी भाषा में उपलब्ध हो जिसे आम आदमी आसानी से समझ सके तो न्याय व्यवस्था के प्रति संवाद और विश्वास दोनों मजबूत होंगे। हिंदी दिवस पर शुरू हुई यह पहल तभी अपने व्यापक उद्देश्य को पूरा करेगी जब इसका विस्तार देश की प्रमुख भारतीय भाषाओं तक हो और न्याय की जानकारी भाषा की कठिनाई के कारण किसी नागरिक से दूर न रहे।