जेन-जी के बीच बदलती राजनीति

वडोदरा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जेन-जी के बीच पहुंचना भारतीय राजनीति में बदलते संवाद की एक महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करता है। मंच तक पहुंचने के लिए बनाया गया रैंप हो या लोकप्रिय संगीत की धुनों के बीच युवाओं के बीच प्रधानमंत्री की मौजूदगी और मोबाइल फोन से उनकी तस्वीरें लेते युवा—पूरा आयोजन पारंपरिक राजनीतिक सभाओं से अलग दिखाई दिया। लेकिन इसकी अहमियत केवल आयोजन की प्रस्तुति में नहीं है। इसके पीछे भारतीय राजनीति की बदलती जरूरत साफ दिखाई देती है। नई पीढ़ी अब केवल मतदाता नहीं रह गई है बल्कि राजनीतिक संवाद का सबसे महत्वपूर्ण वर्ग बनती जा रही है। वडोदरा में हजारों युवाओं की मौजूदगी और प्रधानमंत्री का उनसे सीधा संवाद इस बदलाव का संकेत है। प्रधानमंत्री ने युवाओं को देश की विकास यात्रा से जोड़ने की कोशिश की और भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहने का संदेश दिया। राजनीतिक नजरिए से इस संदेश में विपक्ष पर निशाना भी दिखाई दिया। लेकिन इसका सामाजिक महत्व इससे कहीं व्यापक है। डिजिटल युग में युवा जिस सूचना संसार में रह रहा है वहां तथ्य और प्रचार के बीच अंतर करना लगातार कठिन होता जा रहा है। भारतीय राजनीति में लंबे समय तक जनसभा का अर्थ मंच माइक भाषण और तालियां रहा है। नेता बोलता था और जनता सुनती थी। सोशल मीडिया और डिजिटल संचार ने इस व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है। आज युवा पूरे भाषण के बजाय कुछ मिनट के वीडियो से नेता को समझता है। वह उसी समय प्रतिक्रिया देता है और अपनी राय भी सार्वजनिक करता है।

इसलिए राजनीतिक दलों के सामने चुनौती केवल भीड़ जुटाने की नहीं बल्कि संवाद का नया तरीका खोजने की है। वडोदरा का आयोजन इसी बदलाव का उदाहरण है। रैंप के जरिए युवाओं के बीच पहुंचना उस राजनीतिक दूरी को कम करने का प्रतीक है जो बड़े मंच और दर्शकों के बीच दिखाई देती है। लोकप्रिय संगीत का इस्तेमाल भी बताता है कि राजनीतिक आयोजनों में युवाओं की सांस्कृतिक पसंद को जगह मिल रही है। यह बदलाव किसी एक दल तक सीमित नहीं है। भाजपा हो या कांग्रेस या अन्य राजनीतिक संगठन सभी नई पीढ़ी तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। इसका सीधा संदेश है कि जेन-जी को अब कोई भी बड़ा राजनीतिक संगठन नजरअंदाज नहीं कर सकता। युवाओं की राजनीतिक अहमियत केवल इसलिए नहीं बढ़ी है कि वे डिजिटल माध्यमों का अधिक इस्तेमाल करते हैं। उनकी संख्या भी चुनावी गणित को प्रभावित करती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में 18 से 29 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 23 प्रतिशत रही। यानी लगभग हर चार मतदाताओं में एक युवा था। आने वाले चुनावों में यह वर्ग राजनीतिक दलों के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

लेकिन जेन-जी को केवल वोट बैंक के रूप में देखना बड़ी भूल होगी। यह पीढ़ी रोजगार चाहती है लेकिन केवल नौकरी नहीं। वह कौशल और अवसर चाहती है। वह तकनीक को अपनाना चाहती है लेकिन तकनीकी बदलाव से पैदा होने वाली असुरक्षा को भी समझती है। वह डिजिटल सुविधा चाहती है लेकिन विश्वसनीय सूचना भी चाहती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह देश की प्रगति पर गर्व करने के साथ अपने व्यक्तिगत भविष्य को लेकर ठोस जवाब भी चाहती है। वडोदरा में विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी इस कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के हिस्सों का राष्ट्र को समर्पण और रेल तथा सड़क परियोजनाओं पर जोर सरकार के विकास मॉडल में बुनियादी ढांचे की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है। तेज और बेहतर माल परिवहन उद्योग और व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है। इससे परिवहन लागत कम करने और उत्पादन तथा आपूर्ति व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है। लेकिन युवाओं के बीच विकास की बात तभी पूरी होगी जब उसके साथ रोजगार की ठोस तस्वीर भी सामने आए। आज का युवा कृत्रिम बुद्धिमत्ता रोबोटिक्स डिजिटल अर्थव्यवस्था सेमीकंडक्टर वित्तीय तकनीक और नए उद्योगों के विस्तार की दुनिया में प्रवेश कर रहा है। ऐसे में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं होगी। कौशल तकनीकी समझ और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता अधिक महत्वपूर्ण होगी। इसलिए युवा संवाद को शिक्षा कौशल और रोजगार की नीतियों से जोड़ना जरूरी है।