दुनिया इस समय युद्ध, ऊर्जा संकट और व्यापारिक तनाव जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बदली वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने तेल और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ाया है। वहीं अमेरिका के साथ टैरिफ को लेकर तनाव ने भारत के सामने नई आर्थिक चुनौतियां खड़ी की हैं। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने जिस मजबूती का प्रदर्शन किया है वह निश्चित रूप से उत्साह बढ़ाने वाला है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 6.9 प्रतिशत से अधिक है। यह वृद्धि रिजर्व बैंक के अनुमान से भी बेहतर रही। इसके पीछे मजबूत घरेलू मांग सरकारी पूंजीगत खर्च और सेवा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
सरकार के पूंजीगत खर्च में 18.6 प्रतिशत की वृद्धि बताती है कि आर्थिक दबाव के बावजूद विकास परियोजनाओं पर खर्च जारी रखा गया। सड़क रेल बंदरगाह ऊर्जा और औद्योगिक ढांचे में निवेश से न केवल रोजगार और कारोबार को गति मिलती है बल्कि भविष्य की आर्थिक क्षमता भी मजबूत होती है। इसका असर निजी क्षेत्र की गतिविधियों पर भी पड़ता है।
घरेलू मांग की मजबूती भी अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। यात्री वाहनों की बिक्री में 25.6 प्रतिशत की वृद्धि और बिजली की मांग का 8.4 प्रतिशत तक पहुंचना आर्थिक गतिविधियों में तेजी को दर्शाता है। वहीं वास्तविक जीवीए में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि और सेवा क्षेत्र में मजबूत कारोबारी गतिविधियां अर्थव्यवस्था के व्यापक विस्तार का संकेत देती हैं।
हालांकि इन आंकड़ों को उपलब्धि मानकर संतुष्ट होने की जरूरत नहीं है। रोजगार सृजन ग्रामीण मांग महंगाई निर्यात प्रतिस्पर्धा ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक संरक्षणवाद जैसी चुनौतियां अभी भी सामने हैं। अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव के बीच भारत को निर्यात बाजारों में विविधता लाने और घरेलू उत्पादन को और मजबूत करने की जरूरत है।
भारत के लिए मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां चुनौती के साथ अवसर भी लेकर आई हैं। दुनिया की कंपनियां अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता चाहती हैं और भारत के पास विनिर्माण के क्षेत्र में अपनी भूमिका बढ़ाने का बड़ा अवसर है। इसके लिए नीतिगत स्थिरता तेज निर्णय और बुनियादी ढांचे के विकास को लगातार गति देनी होगी। फिलहाल 7.8 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि यह बताती है कि वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपना लचीलापन साबित किया है। अब सरकार की असली परीक्षा इस विकास दर को बनाए रखने के साथ इसके लाभ को रोजगार और आम आदमी की आय तक पहुंचाने की होगी। संकटों के बीच आर्थिक रफ्तार कायम रहना निश्चित रूप से भारत की बढ़ती आर्थिक क्षमता का मजबूत संकेत है।