फिच ने भारत की ‘बीबीबी-’ रेटिंग को बरकरार रखा , वित्त वर्ष 27 में जीडीपी वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान

नई दिल्ली । वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने भारत की दीर्घकालिक जारीकर्ता डिफॉल्ट रेटिंग को स्थिर आउटलुक के साथ ‘बीबीबी-’ पर बरकरार रखा है। वहीं अल्पकालिक जारीकर्ता डिफॉल्ट रेटिंग को ‘एफ3’ पर कायम रखा गया है। फिच ने भारत की मजबूत विकास संभावनाओं और ठोस बाह्य वित्तीय स्थिति को रेटिंग बनाए रखने का प्रमुख आधार बताया है। फिच के मुताबिक व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और नीतिगत विश्वसनीयता में सुधार का भारत का रिकॉर्ड आगे भी आर्थिक वृद्धि को मजबूती देगा। ऊर्जा संकट से पैदा हुई निकट अवधि की चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन पर फिच ने भरोसा जताया है। रेटिंग एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि मार्च 2027 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी वृद्धि 6.4 प्रतिशत रह सकती है। यह पिछले तीन वर्षों के औसत 7.4 प्रतिशत से कम है लेकिन ‘बीबीबी’ रेटिंग वाले देशों की औसत 2 प्रतिशत वृद्धि से तीन गुना से अधिक है।

फिच ने कहा कि हाल के वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था ने विभिन्न वैश्विक झटकों का मजबूती से सामना किया है और आगे भी यह लचीलापन जारी रहने की उम्मीद है। हालांकि अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़ी अनिश्चितता भारत के लिए जोखिम पैदा कर सकती है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में आयात पर निर्भर है। इसके बावजूद फिच को भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं पर गंभीर असर पड़ने की आशंका नहीं है।

महंगाई पर भी फिच का अनुमान

ऊर्जा संकट के चलते महंगाई बढ़ने की संभावना के बावजूद फिच का अनुमान है कि यह भारतीय रिजर्व बैंक की 2 से 6 प्रतिशत की निर्धारित सीमा में बनी रहेगी। वित्त वर्ष 2027 में औसत महंगाई 4.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है जबकि वित्त वर्ष 2026 में यह 2.1 प्रतिशत रही थी। फिच के अनुसार महंगाई स्थिर होने के संकेत मिल रहे हैं और मुख्य महंगाई करीब 4 प्रतिशत पर बनी हुई है।

फिच ने कहा कि राजकोषीय नीति ने ऊर्जा संकट के कारण महंगाई पर पड़ने वाले असर को सीमित करने में मदद की है। इससे भारतीय रिजर्व बैंक पर भी दबाव कम हुआ है। हालांकि एजेंसी का अनुमान है कि ऊर्जा संकट के दूसरे दौर के प्रभावों और अल नीनो से जुड़े जोखिमों से निपटने के लिए रिजर्व बैंक साल के अंत में नीतिगत दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है। इससे नीतिगत दर 5.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।