व्यवस्था पर करारा तमाचा! बारिश में त्रिपाल के सहारे जला शव, मथुरा के मुकंदपुर में विकास के दावों की खुली पोल

वार्ड नंबर 15 में श्मशान घाट पर छत तक नहीं; भीगते हुए ग्रामीणों ने बांस-लाठियों से त्रिपाल साधकर पूरा किया अंतिम संस्कार, स्थानीय प्रतिनिधि और प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

​मथुरा। एक तरफ जहां सरकारें ग्रामीण और शहरी विकास के बड़े-बड़े दावे करती हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इन दावों का मुंह चिढ़ाती नजर आती है। जिला मथुरा के नगर निगम के वार्ड नंबर 15 स्थित मुकंदपुर गांव से एक ऐसी ही झकझोर देने वाली और शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है, जहाँ बारिश के बीच एक व्यक्ति का अंतिम संस्कार करने के लिए ग्रामीणों को जलती चिता के ऊपर बांस-लाठियों के सहारे त्रिपाल तानना पड़ा।

​सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि श्मशान भूमि पर न तो कोई शेड है और न ही बारिश से बचने का कोई साधन। जब परिजन और ग्रामीण शव का दाह संस्कार कर रहे थे तभी तेज बारिश शुरू हो गई। चिता को बुझने से बचाने के लिए करीब आधा दर्जन से अधिक लोग खुद सिर से पांव तक भीगते हुए हाथ में बांस और लाठियां लेकर पॉलिथीन/त्रिपाल ताने खड़े रहे। इस दौरान जलती चिता से उठता धुआं और बारिश की बौछारें ग्रामीणों के लिए भारी मुसीबत बनी रहीं।

​घटना का वीडियो बना रहे स्थानीय निवासियों का गुस्सा जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों पर साफ झलका। ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा ​”यह मुकंदपुर गांव (वार्ड नंबर 15) का श्मशान घाट है। यहां के पार्षद जितेंद्र सिंह हैं लेकिन श्मशान घाट में शून्य सुविधाएं हैं। न तो बारिश से बचने के लिए कोई टीन शेड है और न ही श्मशान भूमि तक पहुंचने का सही रास्ता। सरकार बजट भेजती है लेकिन जनप्रतिनिधि और अधिकारी सब डकार जाते हैं। बारिश में अगर किसी की मृत्यु हो जाए तो अंतिम संस्कार करना किसी यातना से कम नहीं होता।”

​इंसान की जिंदगी में तो सुविधाओं का अभाव रहता ही है लेकिन मौत के बाद भी सम्मानजनक अंतिम संस्कार न मिल पाना प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा करता है। स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले का तत्काल संज्ञान लेकर मुकंदपुर के श्मशान घाट पर पक्के शेड व मार्ग का निर्माण कराया जाए और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई हो।