नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संविधान निर्माता के सपनों के अनुरूप भारत के निर्माण का आह्वान करते हुए कहा है कि इसके लिए सर्वहित, संस्कृति संरक्षण और समानता के मूल्यों को लेकर आगे बढ़ना होगा।
श्री मोदी ने रविवार को आकाशवाणी पर अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 118वीं कड़ी में राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि इस बार का ‘गणतंत्र दिवस’ बहुत विशेष है। ये भारतीय गणतंत्र की 75वीं वर्षगाँठ है। उन्होंने कहा, “मैं संविधान सभा के उन सभी महान व्यक्तित्वों को नमन करता हूँ, जिन्होंने हमें हमारा पवित्र संविधान दिया। उन्होंने कहा कि संविधान सभा के दौरान अनेक विषयों पर लंबी-लंबी चर्चाएं हुईं। ये चर्चाएं, संविधान सभा के सदस्यों के विचार, उनकी वाणी बहुत बड़ी धरोहर है।
श्री मोदी ने अपने संबोधन में संविधान सभा के सदस्य डॉक्टर बी आर अंबेडकर, डॉ राजेंद्र प्रसाद और डॉ श्यामाचरण मुखर्जी के भाषणों का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने एकमत और सर्वहित पर जोर दिया और डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने अहिंसा और शांति जैसे मूल्यों के संस्कृति संरक्षण को महत्वपूर्ण बताया। प्रधानमंत्री ने डॉक्टर श्यामा चरण मुखर्जी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अवसरों की समानता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि देशवासियों को संविधान निर्माताओं के इन विचारों से प्रेरणा लेकर ऐसे भारत के निर्माण के लिए काम करना है जिस पर हमारे संविधान निर्माताओं को भी गर्व हो।
श्री मोदी ने कहा आज 2025 की पहली ‘मन की बात’ हो रही है। हर बार ‘मन की बात’ महीने के आखिरी रविवार को होती है लेकिन इस बार हम एक सप्ताह पहले चौथे रविवार की बजाय तीसरे रविवार को ही मिल रहे हैं। क्योंकि अगले सप्ताह रविवार के दिन ही ‘गणतंत्र दिवस’ है। मैं सभी देशवासियो को ‘गणतंत्र दिवस’ की अग्रिम शुभकामनाएं देता हूँ।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘गणतंत्र दिवस’ से एक दिन पहले 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस है। ये दिन इसलिए अहम है क्योंकि इस दिन ‘भारतीय निर्वाचन आयोग’ की स्थापना हुई थी। उन्होंने कहा, “मैं चुनाव आयोग का भी धन्यवाद दूंगा जिसने समय-समय पर हमारी मतदान प्रक्रिया को आधुनिक बनाया है मजबूत किया है। आयोग ने जन-शक्ति को और शक्ति देने के लिए तकनीक की शक्ति का उपयोग किया। मैं चुनाव आयोग को निष्पक्ष चुनाव के उनके समर्पण के लिए बधाई देता हूँ। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से ज्यादा-से-ज्यादा संख्या में अपने मत के अधिकार का उपयोग करने का आह्वान करते हुए कहा कि फिर लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बने और इसे मजबूत करें।
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