नई दिल्ली । ईरान ने कतर के सबसे बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस एलएनजी प्लांट रास लफान पर मिसाइल अटैक किया। इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस बाजारों में उथल-पुथल और ज्यादा बढ़ गई है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग का खामियाजा खाड़ी देशों को भुगतना पड़ रहा है। ईरान ने अब अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला करने के साथ ही ऊर्जा सुविधाओं पर भी हमले शुरू कर दिए हैं।
कतर की सरकारी ऊर्जा कंपनी कतर एनर्जी ने गुरुवार को जानकारी दी कि उसके कई लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी एलएनजी सुविधाओं पर मिसाइल हमले हुए हैं। इन हमलों से भारी नुकसान हुआ है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और रूस के साथ-साथ दुनिया के शीर्ष LNG उत्पादकों में कतर का नाम भी शामिल है। दुनिया की सबसे बड़ी एलएनजी सुविधा रस लफान पर हुए इस हमले के बाद इस जगह पर उत्पादन पूरी तरह से रोक दिया गया है।
मार्च के पहले हफ्ते में भी ईरान ने कतर के गैस क्षेत्रों पर मिसाइल हमले किए थे, जिससे दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस निर्यातक QatarEnergy को उत्पादन रोकना पड़ा था। एलएनजी उत्पादक देशों पर हो रहे हमले से भारत जैसे देशों पर विशेष रूप से गहरा असर पड़ रहा है, जो अपनी प्राकृतिक गैस की लगभग 50% जरूरतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से पूरी करते हैं।
भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरतों का करीब 20% हिस्सा कतर से आयात करता है। एनर्जी इकोनॉमिस्ट किरित पारिख के मुताबिक, ‘भारत अपनी नैचुरल गैस की जरूरतों का 50 प्रतिशत हिस्सा इंटरनेशनल मार्केट से इंपोर्ट करता है।’ किरित पारिख का कहना है कि 50 प्रतिशत नेचुरल गैस में से हम अपनी LNG का लगभग 40% हिस्सा कतर से खरीदते हैं, जिसका मतलब है कि भारत के कुल LNG इंपोर्ट का लगभग 20% हिस्सा कतर से आता है। एनर्जी इकोनॉमिस्ट ने भारत की जरूरत कम करने को लेकर कहा, ‘भारत को अपनी गैस की खपत कम करनी होगी। खास तौर पर, इंडस्ट्रियल सेक्टर में और विशेष रूप से पावर सेक्टर में गैस के इस्तेमाल को कम करना होगा।’
ईरान के सरकारी टीवी चैनल ने भी कतर पर हुए इस हमले की पुष्टि की। ईरान के स्टेट टीवी चैनल ने टेलीग्राम पर जानकारी दी कि रास लफान रिफाइनरी पर हमला हुआ है और वहां से आग की लपटों के साथ धुंआ निकलता दिखाई दे रहा है। रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हुए हमले में गैस-टू-लिक्विड्स सुविधा को भारी नुकसान पहुंचा। गैस प्लांट पर हुए हमले से कतर के साथ ही पूरी दुनिया का काफी नुकसान हुआ है।