अष्टमी-नवमी के संधिकाल में मां कात्यायनी की विशेष आरती , भक्तों को बांटा गया खजाना

प्राचीन धार्मिक परंपरा के अनुरूप संपन्न हुआ पूजन-अर्चन, मां के जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर; मुख्य पुजारी कमल तिवारी ने बताया संधि आरती का धार्मिक महत्व

वृंदावन । धर्मनगरी वृंदावन के राधा बाग स्थित प्राचीन मां कात्यायनी मंदिर में शारदीय नवरात्र के अवसर पर अष्टमी और नवमी तिथि के संधिकाल में विशेष संधि आरती का आयोजन किया गया। 51 शक्तिपीठों में शामिल इस मंदिर में निर्धारित शुभ मुहूर्त पर मां भगवती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आरती उतारी गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की।

संधि आरती के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का माहौल दिखाई दिया। मां के जयकारों तथा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भक्तों ने आराध्य के दर्शन किए। मंदिर की प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते हुए इस अवसर पर श्रद्धालुओं के बीच मां का खजाना भी वितरित किया गया। खजाना प्राप्त करने के लिए भक्तों में खासा उत्साह नजर आया। श्रद्धालुओं ने इसे मां भगवती के आशीर्वाद और कृपा से जोड़कर श्रद्धापूर्वक ग्रहण किया।

मंदिर के मुख्य पुजारी कमल तिवारी ने संधि आरती की महत्ता बताते हुए कहा कि अष्टमी और नवमी तिथि के मिलन का समय धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है। इसी विशेष मुहूर्त में मां भगवती की आराधना और संधि आरती करने की परंपरा है। उन्होंने बताया कि मंदिर में वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस अवसर पर विशेष पूजन के साथ मां का खजाना भी भक्तों में बांटा जाता है, जिसमें श्रद्धालु बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं।

मंदिर के प्रबंधक विजय मिश्रा ने बताया कि आयोजन को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए मंदिर प्रबंधन की ओर से आवश्यक तैयारियां की गई थीं। श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन और आरती का लाभ मिल सके, इसके लिए व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं। उन्होंने कहा कि नवरात्र के दिनों में मां कात्यायनी की उपासना का विशेष महत्व है और दूर-दूर से आने वाले भक्त पूरी आस्था के साथ मां के चरणों में शीश नवाते हैं। अष्टमी-नवमी के संधिकाल में हुई विशेष आरती और खजाना वितरण के साथ मंदिर में धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया गया। आयोजन ने श्रद्धालुओं को मां कात्यायनी की भक्ति में सराबोर कर दिया और मंदिर परिसर देर तक भक्तिमय वातावरण से गूंजता रहा।