अरमान मलिक ने 4 साल की उम्र में शुरू की संगीत की ट्रेनिंग , रियलिटी शो से लेकर बॉलीवुड तक बनाया बड़ा नाम

मुंबई । बॉलीवुड के लोकप्रिय सिंगर अरमान मलिक आज अपनी मधुर आवाज और शानदार गायकी के दम पर देश-विदेश में लाखों फैंस के दिलों पर राज करते हैं। रोमांटिक गानों से लेकर पॉप म्यूजिक तक उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उनका संगीत सफर बेहद छोटी उम्र में शुरू हो गया था। महज 9 साल की उम्र में उन्होंने टीवी के मशहूर सिंगिंग रियलिटी शो ‘सा रे गा मा पा लिटिल चैंप्स’ में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था।

22 जुलाई 1995 को मुंबई में जन्मे अरमान ऐसे परिवार से आते हैं, जहां संगीत पीढ़ियों से विरासत का हिस्सा रहा है। उनके दादा सरदार मलिक प्रसिद्ध संगीतकार थे, पिता डब्बू मलिक संगीतकार हैं और चाचा अनु मलिक बॉलीवुड के जाने-माने म्यूजिक डायरेक्टर हैं। ऐसे माहौल में अरमान का संगीत की ओर झुकाव बचपन से ही स्वाभाविक था।

अरमान मलिक के माता-पिता ने जब उनकी गायकी की प्रतिभा देखी, तब वह सिर्फ चार साल के थे। इसके बाद उन्हें हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की ट्रेनिंग दिलाई गई। धीरे-धीरे संगीत उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया और स्कूल के म्यूजिक कॉम्पिटिशन में भी वह लगातार हिस्सा लेने लगे। साल 2006 में उन्होंने ‘सा रे गा मा पा लिटिल चैंप्स’ में भाग लिया। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 9 साल थी। अपनी सुरीली आवाज और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने टॉप-7 कंटेस्टेंट्स में जगह बनाई।

रियलिटी शो के बाद अरमान ने बतौर चाइल्ड सिंगर बॉलीवुड में कदम रखा। साल 2007 में उन्होंने फिल्म ‘तारे जमीन पर’ के लोकप्रिय गाने ‘बम बम बोले’ में अपनी आवाज दी। इसके बाद ‘भूतनाथ’ जैसी फिल्मों में भी उन्होंने गाने गाए। उन्होंने फिल्म ‘माय नेम इज खान’ में एक बच्चे की आवाज की हिंदी डबिंग भी की, जबकि ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ के रेडियो वर्जन में भी अपनी आवाज दी।

अरमान मलिक को असली पहचान साल 2014 में सलमान खान की फिल्म ‘जय हो’ के गाने ‘तुमको तो आना ही था’ से मिली। इसके बाद उन्होंने ‘मैं रहूं या ना रहूं’, ‘चले आना’, ‘बेसब्रियां’, ‘क्यों रब्बा’ और ‘ठहर जा’ जैसे कई सुपरहिट गाने गाए। हिंदी के अलावा अरमान तेलुगु, कन्नड़, बंगाली, मराठी, गुजराती और अंग्रेजी भाषा में भी गाने गा चुके हैं।