मथुरा के NH-19 पर कानून का कत्ल! ‘खूनी’ बाईपास पर अवैध निर्माण, हादसों का खतरा कई गुना बढ़ा
DM के आश्वासन के बाद भी बुलडोजर खामोश, भू-माफिया बेखौफ, पर्यावरण और सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां, हाई कोर्ट के आदेशों की अवमानना
मथुरा। दिल्ली-आगरा हाईवे (NH-19) पर ग्राम छरोरा क्षेत्र के पास चैनेंज 137+ पर नियमों को ताक पर रखकर खुलेआम अवैध निर्माण किया जा रहा है। क्रिस्मेटिक डेवलपर द्वारा बिना नक्शा पास कराए और राजस्व रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर जिस भूमि पर निर्माण कराया जा रहा है, वह सरकारी दस्तावेजों में ‘सड़क बाईपास’ के रूप में दर्ज है। खसरा संख्या 44क, 43 व 42 की यह जमीन हाईवे की है, फिर भी यहां कंक्रीट खड़ा किया जा रहा है।
पूर्व में उद्योग व्यापार मंडल द्वारा जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया था जिस पर प्रशासन ने हाईवे की जमीन पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण न होने देने का भरोसा दिया था। लेकिन मौके की हकीकत प्रशासन के दावों को आईना दिखा रही है। निर्माण कार्य जारी है और भू-माफिया प्रशासन की नाक के नीचे खेल खेल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस निर्माण से अन्य भू-स्वामियों के मुख्य रास्ते पूरी तरह बंद हो जाएंगे।
इस प्रोजेक्ट के लिए न तो पेड़ों को काटने की अनुमति ली गई और न ही खनिज विभाग से गड्ढा खोदने की मंजूरी। प्रदूषण विभाग की अनिवार्य एनओसी आज तक नहीं ली गई। हाईवे किनारे ग्रीन बेल्ट अनिवार्य है, लेकिन यहां हरियाली को कंक्रीट में बदला जा रहा है। हाईवे की पटरी पर निर्माण से विजिबिलिटी घटेगी और हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।
ध्यान देने वाली बात यह है कि के.डी. डेंटल कॉलेज अंडरपास से आने-जाने वाले वाहनों के कारण यहां पहले से ही अधिकांश समय जाम की स्थिति बनी रहती है। ऐसे में ठीक पास हो रहा निर्माण कार्य कोढ़ में खाज साबित होगा और यातायात पूरी तरह चरमरा जाएगा।
अगर कल को यहां कोई बड़ा हादसा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? सर्किल रेट का खेल, किसानों के रास्ते सील
हैरानी की बात यह है कि हाईवे की जमीन का सर्किल रेट सामान्य भूमि से चार गुना अधिक है। इसके बावजूद व्यावसायिक लालच में हाईवे से जुड़े रास्तों को ब्लॉक किया जा रहा है, जिससे आम जनता और किसानों के मौलिक अधिकारों का सीधा हनन हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मौके पर इतनी जगह ही नहीं बची कि यहां किसी भी प्रकार का निर्माण वैध माना जा सके। रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो चुका है।
आम नागरिकों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे मामले की मजिस्ट्रेट जांच कराई जाए और उक्त स्थान को सर्विस रोड के लिए मुक्त रखा जाए, ताकि भविष्य में कोई बड़ा हादसा न हो। अब सवाल सिर्फ निर्माण का नहीं, लोगों की जान का है। देखना यह है कि कानून बोलेगा या कंक्रीट की दीवारें जीतेंगी।