ईरान आसमान में बिछाएगा अमेरिका के लिए जाल, रुस से हुई गुप्त डील
रुसी ‘वर्बा’ लॉन्च यूनिट और 2,500 ‘9एम336’ मिसाइलों से अमेरिका की बढ़ी टेंशन
तेहरान । ईरान और अमेरिका में तनाव के बीच एक तरफ कूटनीति की कोशिशें तेज हो रही हैं, तो दूसरी तरफ दोनों देशों ने हथियार तान रखे हैं। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने पुष्टि की है कि अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता का अगला दौर गुरुवार को जिनेवा में होगा, लेकिन इसी बीच एक ऐसी खबर आई है जो अमेरिका की टेंशन बढ़ा सकती है। ईरान को रूस घातक हथियार देने को तैयार हो गया है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान और रूस के बीच 500 मिलियन यूरो की एक गुप्त हथियार डील हुई है। इसके तहत रूस तीन साल में 500 ‘वर्बा’ लॉन्च यूनिट और 2,500 ‘9एम336’ मिसाइलें देगा। ये सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें हैं, जिन्हें जमीन, समुद्र या हवा से दागा जा सकता है। बताया जा रहा है कि यह समझौता दिसंबर 2025 में मॉस्को में हुआ था। रूस की सरकारी हथियार निर्यात कंपनी और ईरान के रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधियों के बीच यह सौदा तय हुआ। इससे साफ है कि ईरान संभावित टकराव की तैयारी भी साथ-साथ कर रहा है। पिछले साल ईरान के एयर डिफेंस को हमले में नुकसान हुआ था, लेकिन वर्बा मिसाइल एक ऐसा एयर डिफेंस है, जिसे अमेरिका ट्रैक ही नहीं कर सकेगा, इसलिए यह ईरान के लिए मास्टर स्ट्रोक है।
वर्बा जिसे 9के333 सिस्टम के नाम से भी जाना जाता है, रूस का कंधे पर रखकर दागा जाने वाला एयर डिफेंस हथियार है। इसे 2014 में सेना में शामिल किया गया था। यह छोटी लेकिन बेहद घातक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जिसे एक सैनिक अकेले इस्तेमाल कर सकता है। इसकी मुख्य मिसाइल 9एम336 करीब 500 मीटर से 6.5 किलोमीटर तक के लक्ष्य को निशाना बना सकती है। यह 10 मीटर से लेकर करीब 4.5 किलोमीटर तक उड़ रहे टारगेट को गिरा सकती है यानी अगर कम ऊंचाई पर एफ-16 जैसे जेट भी उड़ेंगे तो वह इसका शिकार हो जाएंगे। इसकी रफ्तार 500 से 600 मीटर प्रति सेकंड है, जिससे तेज उड़ते विमान या ड्रोन भी बच नहीं सकते। यही ईरान के दुश्मनों की टेंशन बनेंगे।
वर्बा की सबसे बड़ी ताकत इसका खास थ्री-चैनल सीकर सिस्टम है। यह अल्ट्रावायलेट, नियर इंफ्रारेड और मिड इंफ्रारेड तीनों स्पेक्ट्रम में काम करता है। आम मिसाइलें सिर्फ गर्मी पकड़ती हैं, लेकिन वर्बा लक्ष्य की पहचान ज्यादा सटीक तरीके से और फ्लेयर्स जैसे धोखे से आसानी से नहीं फंसती। यह फायर-एंड-फॉरगेट सिस्टम है, यानी दागने के बाद ऑपरेटर को उसे गाइड नहीं करना पड़ता। यह सिर्फ फाइटर जेट या हेलीकॉप्टर ही नहीं, बल्कि ड्रोन और क्रूज मिसाइल जैसे छोटे और कम गर्मी छोड़ने वाले टारगेट को भी मार सकती है। करीब 17 किलो वजन होने के कारण इसे एक सैनिक आसानी से कंधे पर लेकर चल सकता है।
यही वजह है कि यह गुरिल्ला युद्ध या सीमित संसाधनों वाली सेना के लिए बेहद असरदार हथियार माना जाता है। ईरान जैसे देश के लिए यह खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि हाल के हमलों में उसकी हवाई सुरक्षा पर सवाल उठे थे। वर्बा जैसे सिस्टम से वह कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन और मिसाइल खतरों से बेहतर तरीके से निपट सकता है।