जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह का ‘मंडे मॉर्निंग टेस्ट’, कुर्सी खाली देख जारी किया नोटिस
मथुरा। जिले के आला अधिकारियों के लिए शुक्रवार की सुबह किसी ‘सरप्राइज टेस्ट’ से कम नहीं रही। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने आज खुद ‘मास्टरजी’ की भूमिका में आकर कार्यालयों की हाजिरी चेक की, जिसमें जिले के पांच ‘मॉनिटर’ (विभागाध्यक्ष) अपनी क्लास (ऑफिस) से नदारद मिले।
अमूमन अधिकारी मोबाइल पर व्यस्त रहते हैं लेकिन डीएम साहब ने आज पुराने लैंडलाइन फोन को अपना हथियार बनाया। सुबह 10:05 से 10:20 बजे के बीच जब जिलाधिकारी ने एक के बाद एक विभागों के फोन घुमाए, तो दूसरी तरफ सन्नाटा मिला। मुख्यमंत्री के आदेशानुसार 10 से 12 बजे तक जनसुनवाई अनिवार्य है, लेकिन इन 15 मिनटों के ‘रियलिटी चेक’ ने प्रशासन की पोल खोल दी।
डीएम की इस औचक जांच में जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, सहायक निबंधक (सहकारी समिति) और बीडीओ नंदगांव अपनी कुर्सियों पर नहीं मिले।
जिलाधिकारी ने साफ कर दिया है कि जनसुनवाई में ‘शॉर्टकट’ नहीं चलेगा। शासन के निर्देशों का पालन न करना और जनता को इंतजार कराना ‘अनुशासनहीनता’ की श्रेणी में आता है। डीएम ने इन सभी पांचों अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस थमाते हुए 3 दिन के भीतर ‘होमवर्क’ (स्पष्टीकरण) पूरा कर जवाब देने को कहा है।
डीएम का संदेश साफ़ है: > “साहब, अगर जनता ऑफिस के बाहर खड़ी है, तो अधिकारी को कुर्सी पर होना ही होगा। वरना अगली बार लैंडलाइन की घंटी कार्रवाई की दस्तक बनकर गूंजेगी।”