वैश्विक दबाव से धड़ाम हुआ शेयर बाजार: सेंसेक्स 1048 अंक लुढ़का, निफ्टी 25500 के नीचे बंद

नई दिल्ली। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजारों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों, धातु आईटी और कमोडिटी शेयरों में व्यापक बिकवाली तथा निवेशकों की सतर्कता के चलते बाजार पूरे सत्र में दबाव में रहा। कारोबार के अंत में प्रमुख सूचकांक एक प्रतिशत से अधिक टूटकर बंद हुए। विदेशी मुद्रा बाजार में भी कमजोरी दिखी और रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 3 पैसे गिरकर 90.64 पर बंद हुआ।

बीएसई सेंसेक्स 1,048.16 अंक यानी 1.25 प्रतिशत गिरकर 82,626.76 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 1,140.37 अंक तक टूटकर 82,534.55 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया। एनएसई निफ्टी 50 336.10 अंक यानी 1.30 प्रतिशत गिरकर 25,471.10 पर बंद हुआ। दिन में एक समय यह 25,444.30 तक फिसल गया था, जो निवेशकों की घबराहट को दर्शाता है। धातु, आईटी, ऊर्जा और उपभोक्ता कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई। निवेशकों ने जोखिम भरे सेक्टरों से दूरी बनाते हुए सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया। आईटी कंपनियों पर वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा और एआई आधारित बदलावों की आशंकाओं का दबाव देखा गया।

गिरावट वाले प्रमुख शेयरों में हिंदुस्तान यूनिलीवर, टाइटन कंपनी, टाटा स्टील, अदानी पोर्ट्स, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, पावरग्रिड, रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, एशियन पेंट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक और एचसीएल टेक्नोलॉजीज शामिल रहे। वहीं बजाज फाइनेंस और भारतीय स्टेट बैंक ही बढ़त के साथ बंद हुए।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर के अनुसार कमजोर वैश्विक संकेतों और आगामी अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों से पहले निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
उन्होंने कहा कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौते से बने सकारात्मक संकेतों का असर कमजोर पड़ गया है। एआई आधारित तकनीकी बदलावों की आशंका और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के कारण भारतीय आईटी कंपनियों की आय संभावनाओं पर दबाव की चिंता बढ़ी है। बाजार को आशंका है कि श्रम आधारित मॉडल पर निर्भर भारतीय आईटी कंपनियों को नैस्डैक में सूचीबद्ध वैश्विक तकनीकी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।
बाजार में आई तेज गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में हजारों करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई। व्यापक बिकवाली के चलते मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव बना रहा, जिससे बाजार का समग्र रुझान कमजोर दिखाई दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेत, अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़े, कच्चे तेल की कीमतें और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े वैश्विक रुझान निकट भविष्य में बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाने और दीर्घकालिक निवेश दृष्टिकोण बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

शुक्रवार की गिरावट ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर अभी जारी रह सकता है।