छपरा-मथुरा पैसेंजर में शर्मसार हुई इंसानियत: ताली बजाकर किन्नर का मजाक उड़ाने पर बढ़ा विवाद, जनरल कोच बना अखाड़ा

कानपुर/मथुरा (​राजपथ ब्यूरो) । छपरा से मथुरा की ओर जा रही छपरा–मथुरा पैसेंजर के जनरल कोच में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक यात्री और किन्नर के बीच हुआ मामूली विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। घटना का मुख्य कारण यात्री द्वारा किन्नर की पहचान का उपहास उड़ाना बताया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यात्री की ‘अमर्यादित टिप्पणी’ ने आग में घी डालने का काम किया, जिससे कोच में काफी देर तक अराजकता का माहौल बना रहा।

​​ट्रेन जब अपने गंतव्य की ओर बढ़ रही थी तभी किन्नरों का एक समूह नेग (पैसे) मांगने पहुंचा। कोच में मौजूद एक यात्री ने न केवल पैसे देने से इनकार किया बल्कि कथित तौर पर ताली बजाकर और व्यंग्यात्मक लहजे में पैसे मांगकर किन्नर का मजाक उड़ाया। अपनी पहचान और परंपरा का सरेआम अपमान होते देख किन्नर आपा खो बैठा। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच गाली-गलौज शुरू हुई और मामला हाथापाई तक पहुंच गया।

​इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कोच में चीख-पुकार मची रही। हैरानी की बात यह है कि घटना के वक्त जीआरपी या आरपीएफ का कोई भी जवान मौके पर मौजूद नहीं था। यात्रियों ने खुद हस्तक्षेप कर मामले को शांत कराया। वायरल हो रहे वीडियो ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और ‘महिला-सुरक्षा’ के दावों की पोल खोल दी है, क्योंकि इस हंगामे के दौरान कोच में मौजूद महिलाएं और बच्चे सहमे नजर आए।

​यह घटना केवल एक झगड़ा नहीं, बल्कि समाज में ‘थर्ड जेंडर’ के प्रति गहरी जड़ें जमा चुकी संकीर्ण मानसिकता का प्रमाण है। विशेषज्ञों का मानना है कि भीड़भाड़ और गर्मी के कारण यात्रियों का धैर्य जवाब दे रहा है, जिससे छोटी-छोटी बातें हिंसक रूप ले रही हैं। कानूनन किसी की पहचान पर तंज कसना अपराध है, जिसका उल्लंघन इस घटना में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।