तंत्र-मंत्र के फेर में उजड़ा पूरा परिवार! खप्परपुर की पांच मौतों से गांव में सन्नाटा, हर जुबां पर एक ही सवाल – आखिर क्यों?
आस्था की आड़ में तांत्रिक का 'जाल' या मानसिक रोग?
मथुरा। महावन तहसील के गांव खप्परपुर में मंगलवार को जो हुआ उसने न केवल पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि इंसानियत को भी सन्न कर दिया है। एक हंसते-खेलते परिवार के पांच सदस्यों की चिताएं जब एक साथ जलीं, तो आसमान भी रो पड़ा। किसान मनीष जाटव ने अपनी पत्नी और तीन मासूम बच्चों की बलि चढ़ाने के बाद खुद मौत को गले लगा लिया। गांव में सन्नाटा ऐसा है कि महिलाओं की सिसकियां दूर तक सुनाई दे रही हैं।
इस वीभत्स घटना पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगत आत्माओं के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन को निर्देशित किया है कि पीड़ित परिवार की हर संभव मदद की जाए और घटना के हर पहलू की बारीकी से जांच हो। जिलाधिकारी ने बताया कि पुलिस और प्रशासन मामले की तह तक जाने में जुटे हैं।
जांच में जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे चौंकाने वाले हैं। परिजनों के अनुसार तीन वर्ष पूर्व मनीष नशे का आदि था। उसकी मां श्यामवती और पत्नी सीमा उसे सुधारने के लिए पड़ोसी गांव स्थित हवेली के मंदिर में एक तांत्रिक के पास ले गई थीं। तांत्रिक के बेटे ने हवन और पूजा-पाठ के जरिए मनीष का नशा छुड़वाने का दावा किया। इसके बाद मनीष पूरी तरह तांत्रिक के चंगुल में फंस गया और उसका ‘खास चेला’ बन गया। मनीष हर मंगलवार और शनिवार को मंदिर की ‘गद्दी’ पर बैठता था और मरीजों के लिए भभूति की पुड़ियाँ तैयार करता था। हिरासत में लिए गए तांत्रिक ने पुलिस को बताया कि मनीष पिछले कुछ महीनों से मानसिक रूप से परेशान था।
मनीष को सिर में खालीपन और बदन दर्द की शिकायत थी। उसने बिना डॉक्टरी सलाह के किसी रिश्तेदार की दवाइयां खा ली थीं, जिससे उसकी स्थिति और बिगड़ गई। हालांकि बाद में मथुरा के एक डॉक्टर से उसका इलाज भी चला था। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या मनीष को किसी खास ‘अनुष्ठान’ के लिए उकसाया गया था या फिर वह ‘साइकॉसिस’ जैसी गंभीर मानसिक बीमारी का शिकार हो गया था।
खप्परपुर गांव की स्थिति यह है कि हर ग्रामीण की जुबां पर बस एक ही सवाल है आखिर मनीष ने अपने ही कलेजे के टुकड़ों पर कुल्हाड़ी कैसे चला दी? गांव में रिश्तेदारों और शुभचिंतकों का तांता लगा हुआ है जो इस घड़ी को कोस रहे हैं।
गांववासी अपने-अपने घरों में बैठकर इस सामूहिक कांड पर चर्चा करते रहे। हर किसी की जुबां पर एक ही सवाल था आखिर ऐसा क्या हुआ कि पूरा परिवार मौत की राह पर चल पड़ा? गांव के बुजुर्ग इस घटना को अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र से जोड़कर देख रहे हैं। बुजुर्गों के बीच इस विषय पर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं जिससे साफ है कि मामले की तह तक जाना अभी बाकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि मृतक मनीष लगातार अपनी जमीन बेच रहा था। करीब पांच वर्ष पूर्व परिवार में भाइयों के बीच बंटवारा हो चुका था। आर्थिक स्थिति ठीक-ठाक होने के बाद मनीष का व्यवहार बेपरवाह हो गया था जिसे लेकर गांव में पहले भी चर्चाएं होती थीं।
फिलहाल पूरे गांव की नजर पुलिस की जांच पर टिकी है। लोग चाहते हैं कि तहकीकात में सच्चाई सामने आए और यह साफ हो सके कि इस सामूहिक मौत के पीछे अंधविश्वास, मानसिक दबाव या कोई और बड़ा कारण जिम्मेदार है।