ऐतिहासिक बंगाली घाट भी निशाने पर
मथुरा। यमुना नदी के ऐतिहासिक घाटों के नवीनीकरण के नाम पर सरकारी धन की खुली बर्बादी का आरोप सामने आया है। सिंचाई विभाग द्वारा कराए जा रहे कार्यों में मजबूत, चिकने और पूरी तरह सुरक्षित पत्थरों को तोड़कर हटाया जा रहा है और उनकी जगह नए पत्थर लगाए जा रहे हैं जबकि इन कीमती पत्थरों को बिना तोड़े समूची अवस्था में निकालकर अन्य स्थानों पर व्यवस्थित किया जा सकता है। इसके बावजूद पूरे घाट तोड़कर दोबारा निर्माण कराया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार शहर क्षेत्र में यमुना किनारे आधा दर्जन से अधिक घाटों पर नवीनीकरण कार्य चल रहा है जिस पर लाखों रुपये का बजट स्वीकृत बताया जा रहा है। आरोप है कि वर्तमान में जिन घाटों पर निर्माण कराया जा रहा हैं वो आज भी पूरी तरह मजबूत हालत में हैं उन्हें भी तोड़कर नया निर्माण कराया जा रहा है। आखिर क्यों।
स्थानीय निवासी गणेश चतुर्वेदी ने बताया कि घाटों पर लगे पत्थर आज भी इतने मजबूत हैं कि एक-एक पत्थर को तोड़ने में कई-कई घंटे लग रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें तोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यमुना के दूसरी ओर जहां नए घाट बनाए जाने चाहिए वहां काम न कराकर पहले से बने घाटों को तोड़कर सरकारी धन की बर्बादी की जा रही है।
यमुना के ऐतिहासिक घाटों के नवीनीकरण के नाम पर बंगाली घाट (आगरा होटल के सामने) पुराने और बेहद मजबूत पत्थरों को तोड़ा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ये पत्थर कीमती और पूरी तरह उपयोग योग्य हैं जिन्हें बिना तोड़े निकालकर अन्य घाटों या सार्वजनिक स्थलों पर लगाया जा सकता है। इसके बावजूद सिंचाई विभाग इन्हें तोड़कर नष्ट करा रहा है जिससे सरकारी धन के साथ-साथ ऐतिहासिक विरासत को भी नुकसान पहुंच रहा है।
घाट क्षेत्र निवासी राजकुमार शर्मा ने कहा घाट बिल्कुल सही हालत में थे। मरम्मत करनी थी तो वहीं करते पूरे घाट तोड़ना समझ से बाहर है। यह विकास नहीं लूट है।
श्रद्धालु उषा देवी ने कहा हम रोज स्नान के लिए आते हैं। पहले घाट सुरक्षित थे अब जगह-जगह टूट-फूट और फिसलन है। हादसे का खतरा बढ़ गया है।
स्थानीय दुकानदार मुकेश अग्रवाल ने कहा नवीनीकरण के नाम पर बार यही कहानी दोहराई जाती है। पुराने पत्थर तोड़कर लाखों का भुगतान हो जाता है। इसकी जांच होनी चाहिए।
स्थानीय निवासी गणेश चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि मजबूत और साफ-सुथरे घाटों को न तोड़ा जाए तथा अनावश्यक निर्माण रोककर सरकारी धन की बर्बादी बचाई जाए। उन्होंने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराकर जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
यमुना घाटों पर चल रहे इस नवीनीकरण कार्य को लेकर अब शहर में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो नवीनीकरण के नाम पर लाखों रुपये की और बर्बादी तय है।