मथुरा/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के जेवर (नोएडा) में बन रहे एशिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नामकरण को लेकर अब तक की सबसे बड़ी मांग सामने आई है। ब्रज हेरिटेज फाउंडेशन के चेयरमैन सचिन चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखकर जेवर एयरपोर्ट का नाम “श्री कृष्ण योगीराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा” रखने की पुरजोर वकालत की है।
इस पत्र ने न केवल प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है बल्कि इसे सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण से जोड़कर एक बड़े जन-आंदोलन की आहट के रूप में देखा जा रहा है।
”ईंट-पत्थर की संरचना नहीं, भारत की आत्मा का द्वार बने जेवर”
पत्र में बेहद आक्रामक और तार्किक शब्दों का प्रयोग करते हुए सचिन चतुर्वेदी ने कहा है कि अयोध्या और काशी के बाद अब मथुरा-ब्रज की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक पटल पर स्थापित करने का समय आ गया है। उन्होंने तर्क दिया है कि जेवर हवाई अड्डा ब्रजभूमि के प्रवेश द्वार पर स्थित है, ऐसे में इसका नाम दुनिया के महानतम कर्मयोगी भगवान श्रीकृष्ण के नाम पर होना चाहिए।
क्यों उठी यह मांग? पत्र की 5 बड़ी बातें:
सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर: विदेशी सैलानी जब भारत की धरती पर उतरें, तो उन्हें अहसास होना चाहिए कि वे सभ्यता की जन्मभूमि में आए हैं।
योगीराज का स्वरूप: श्रीकृष्ण केवल धर्म के प्रतीक नहीं, बल्कि महान रणनीतिकार और ‘योगीराज’ हैं, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली और सांस्कृतिक दृष्टि से मेल खाते हैं।
ग्लोबल पहचान: ‘श्री कृष्ण योगीराज’ नाम से ब्रज के पर्यटन और स्थानीय व्यापार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई गति मिलेगी।
जनभावना का सैलाब: ब्रजवासियों, संत समाज और दुनिया भर के करोड़ों कृष्ण भक्तों की ओर से यह एक ‘भावपूर्ण और अंतिम’ निवेदन है।
इतिहास में स्थान: यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों को बताएगा कि उत्तर प्रदेश ने विकास की दौड़ में अपनी जड़ों को नहीं छोड़ा।
”यह केवल नामकरण नहीं, बल्कि भारत की आत्मा को आकाश देने जैसा निर्णय होगा। जब अयोध्या में राम और काशी में शिव विराज रहे हैं, तो जेवर की धरती ‘योगीराज श्रीकृष्ण’ के नाम से क्यों नहीं गूँजनी चाहिए?”
— सचिन चतुर्वेदी, चेयरमैन, ब्रज हेरिटेज फाउंडेशन
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
पत्र के सार्वजनिक होते ही ब्रज क्षेत्र के युवाओं और बुद्धिजीवियों ने सोशल मीडिया पर अभियान शुरू कर दिया है। जानकारों का मानना है कि जेवर एयरपोर्ट का नाम ‘योगीराज’ के नाम पर रखना न केवल धार्मिक बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी एक मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है।
अब सबकी नजरें लखनऊ पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिन्हें स्वयं योग और सनातन परंपरा का ध्वजवाहक माना जाता है, ब्रज की इस ‘आक्रामक’ और ‘भावपूर्ण’ मांग पर क्या निर्णय लेते हैं।